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धूल फांक रही लाखों की ई-मित्र प्लस मशीनें, नहीं हो रहा उपयोग

विभिन्न दस्तावेज के लिए भटकते लोगों को राहत देने के लिए लगाई

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धूल फांक रही लाखों की ई-मित्र प्लस मशीनें, नहीं हो रहा उपयोग

धूल फांक रही लाखों की ई-मित्र प्लस मशीनें, नहीं हो रहा उपयोग

बज्जू. उपखंड मुख्यालय सहित ग्राम पंचायतों में विभिन्न प्रमाण पत्र, जमाबंदी नकल सहित कई कार्यों के लिए ई मित्र केन्द्रों पर भटकते लोगों को राहत पहुंचाने के लिए करीब पांच साल पहले राज्य सरकार की ओर से विभिन्न कार्यालयों व पंचायतों में मुहैया करवाई गई ई-मित्र प्लस मशीनें लगाई थी, लेकिन उपयोग नहीं होने से ये मशीन धूल फांक रही है।

ग्रामीणों को डिजिटल तकनीक से जोडऩे की सरकार की मंशा के विपरीत अधिकांश जगह पर मशीनों का उपयोग नहीं हो रहा है। एक मशीन की कीमत करीब ढाई से तीन लाख रुपए है। सरकार की मंशा थी कि ई-मित्र सम्बंधित कार्यों के लिए केन्द्रों पर भटकते लोग मशीन का स्वयं उपयोग कर अपने कार्यों को कर सकेंगे,। इससे उन्हें परेशानी नहीं उठानी पड़ेगी, लेकिन ब्लॉक में अधिकतर जगह मशीनें सुचारू नहीं हैं।

दो तरह की मशीनें
ई-मित्र प्लस कियोस्क में दो तरह की मशीनें लगाई गई है। इसमें एक में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की सुविधा है। दूसरी मशीन में केश एसेप्टर, कार्ड रीडर, मेटेलिक की-बोर्ड, थर्मल एवं लेजर प्रिंटर है। जरूरी दस्तावेजों के प्रिंट भी इसी मशीन से निकलेंगे। सुविधा का भुगतान भी लोगों को मशीन में करना है। इसमें एटीएम कार्ड एवं नकद भुगतान दोनों की व्यवस्था है।

यह मिलनी थी सुविधा
मशीन के जरिए जमाबंदी की नकल से लेकर मूल निवास प्रमाण पत्र तक के प्रिंट आवेदक स्वयं निकाल सकते हैं। इसके लिए ना कोई ई-मित्र संचालक की जरूरत पड़ेगी और ना हीं किसी ऑपरेटर की। लोगों को अपनी एसएसओ आईडी बनाकर मशीन में सम्बंधित विभाग का चयन कर आईडी दर्ज करनी होगी। आमजन को महज सुविधा का निर्धारित शुल्क इसमें डालना होगा।

कैसे चलाएं मशीन
ग्राम पंचायतों के साथ ही विभाग ने तहसील-उपखंड कार्यालय, अस्पताल आदि में भी मशीनें तो लगा दी, लेकिन लोगों को इन्हें चलाने की कोई जानकारी नहीं है। ई-मित्र संचालक भी लोगों को मशीनें से सम्बंधित कोई जानकारी नहीं देते है। ऐसे में बिना प्रशिक्षण या अभ्यास के अभाव में लोग मशीनें चलाने में परेशानी महसूस करते हैं। इससे मशीनों का उपयोग नहीं हो रहा हैऔर लाखों रुपए की मशीनें लोगों के लिए अनुपयोगी साबित हो रही हैं।