
समय से पहले फसलों की कटाई शुरू
ठुकरियासर. इस बार समय से पूर्व तेज गर्मी के कारण रबी की फसलें सूख गई। जिससे किसानों को रबी की सभी फसलों की कटाई करना परेशानी का सबब बन गया है। वहीं गेहूं, चना व मैथी की पैदावार व गुणवत्ता पर भी असर पडऩे की आशंका बन गई है। इसके अलावा एक ही समय फसलों की कटाई तथा खलियानों का कार्य होने से मजदूरों की कमी होने लगी है।
पैदावार पर पड़ेगा असर
रबी की फसलें समय से पहले पकने लगी हैं और फसल अपना जीवन काल पूरा नहीं कर पा रही है। समय से पूर्व फसल कटने के कारण चना, मैथी व गेहूं की पैदावार पर काफी असर पड़ेगा और उत्पादन भी कम होने की आशंका जताई जा रही है। इसके साथ ही गेहूं, चने के दाने छोटे और कमजोर हो रहे हैं।
मजदूरों की कमी खली
रबी की सभी फसलों में कटाई कार्य एक ही साथ होने के कारण मजदूरों की कमी हो गई है। सत्तासर के किसान विक्रमङ्क्षसह पंवार ने बताया कि फसल कटाई के इस समय अमूमन मजदूरी तीन सौ से चार सौ रुपए होते हैं लेकिन इस बार मजदूरी लागत बढ़ गई है। इस समय मंजदूरी पांच सौ से छह सौ रुपए चल रही है। इसके बावजूद भी मजदूर मिलने मुश्किल हो रहे हैं।
यह हुआ बिजान
इस बार श्रीडूंगरगढ़ तहसील क्षेत्र में रबी की फसल के तहत चना 39 हजार 99 हेक्टेयर, सरसों 32 हजार 937 हेक्टेयर, गेहूं 27 हजार 82 हेक्टेयर, मेथी 10 हजार 667 हेक्टेयर, इसबगोल 8 हजार 691 हेक्टेयर के अलावा जौ, जीरा, प्याज, तारामीरा सहित कुल 1 लाख 22 हजार 703 हेक्टेयर बीघा जमीन पर फसलों का बिजान किया गया।
फसल पर होगा असर
मार्च के दूसरे हफ्ते से तापमान में अचानक वृद्धि से फसल चक्र पर विपरीत असर पड़ा है। ठुकरियासर गांव के किसान लिछूराम गोदारा बताते हैं कि क्षेत्र में होली से पूर्व गर्म हवा के चलने व अचानक तापमान बढऩे के कारण बढ़वार व फाल पर आई रबी की फसलें झुलस गई और निर्धारित समय से पूर्व ही करीब 15 दिन पहले फसलों की कटाई शुरू करनी पड़ी है। इसके साथ ही बिना मौसम की गर्मी से फाल पर असर पड़ा है। जिससे चने में तीसरा फाल नहीं आ पाया। वहीं गेहूं व मेथी के दाने छोटे और कमजोर हुए हैं। उत्पादन भी कम होगा और इनकी गुणवत्ता पर भी असर पड़ेगा।
Published on:
31 Mar 2022 10:50 am
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