
mukam
बीकानेर. वर्तमान में ग्लोब्ल वार्मिंग को लेकर वर्तमान में जहां पूरा विश्व चिंतित है, वहीं इस समस्या को लेकर बिश्नोई समाज के संस्थापक श्री गुरु जंभेश्वर महाराज ने करीब साढ़े पांच सौ साल पूर्व ही आगाह कर दिया था। यह मुहिम आज भी मुकाम में चल रही है।
जांभोजी ने अपनी शब्दवाणी में कहा कि 'सिर साटै रूंख रहे तो भी सस्तो जांण...Ó अर्थात पर्यावरण व पृथ्वी को बचाने के लिए पेड़ पौधों की रक्षा का नियम उन्होंने अपनी २९ नियमों की नियमावली में आज से साढ़े पांच सौ साल पूर्व ही स्थापित कर दिया था।
जांभोजी द्वारा प्रतिपादित नियमों की पालना करते हुए जोधपुर के खेजड़ली गांव में खेजड़ी के वृक्षों काटने से बचाने के लिए अमृतादेवी बिश्नोई के नेतृत्व में बिश्नोई समाज के ३६३ लोगों ने अपने प्राणों की आहुती दे दी जो पर्यावरण संरक्षण के लिए पूरे विश्व में एक मात्र उदाहरण है।
वहीं वन्य जीवों के संरक्षण को लेकर भी इस समाज के लोग बहुत जागरूक है तथा मुख्य रूप से हिरणों की रक्षार्थ भी कई लोग शिकारियों की गोली के शिकार हो चुके हैं।
पॉलीथिन रहित है मुकाम मेला क्षेत्र
पर्यावरण प्रदूषण का मुख्य कारण पॉलीथिन है और मुकाम मेला एसा प्रथम मेला है जो पॉलीथिन से मुक्त मेला है। मेले को पॉलीथिन मुक्त बनाने और लोगों को जागरूक करने के लिए सन २००५ से खम्मूराम बिश्नोई के नेतृत्व में युवाओं ने पूरा किया है।
मेले अब पॉलीथिन के जगह कपड़े की थैलियों को वितरण किया जात है, वहीं प्लास्टिक की ग्लास या अन्य सामग्री जो पर्यावरण के लिए खतरनाक है उसे यह टीम मेले के करीब तीन किलोमीटर के क्षेत्र में से उठाकर नष्ट करने का बीड़ा भी उठाए हुए है।
पेरिस के फ्रेंक वोगेल कर रहे हैं रिसर्च
पर्यावरण संरक्षण को लेकर बिश्नोई समाज से प्रेरित पेरिस के फ्रेंक वोगले भी हर साल मुकाम मेले में आते है। वे जांभोजी के नियमों पर आधारित पर्यावरण संरक्षण पर शोध कार्य कर रहे हैं। पर्यावरण व जल संरक्षण को लेकर फ्रेक वोगेल पूर्व में नील नदी और ब्रह्मपुत्र नदी के जल संरक्षण को लेकर शोध कार्य कर चुके है। इसके अलावा जांभोजी के नियमों पर कई डॉक्यूमेंट्री भी बन चुकी है।
सेवक दल ७५ साल से संभालता है सभी व्यवस्थाएं
मेले में व्यवस्थाओं को लेकर वैसे तो प्रशासनिक स्तर पर प्रबंध किए जाते है, लेकिन मुख्य रूप से सभी व्यवस्थाओं को संभालने का काम अखिल भारतीय जंभेश्वर सेवक दल के सदस्य ७५ साल से कर रहे है। सेवक दल की ओर से मेले में यातायात, सुरक्षा, बिजली, पानी, भोजनशाला, मंदिर में दर्शनार्थ व्यवस्था, पार्किंग आदि व्यवस्थाओं के लिए पूरी मुस्तैदी के साथ निशुल्क ड्यूटी करते हैं।
धूम्रपान पर हैं पाबंदी
मेला क्षेत्र में बीड़ी, गुटखा, सिगरेट, शराब सहित अन्य सभी प्रकार के धूम्रपान पर सख्त पाबंदी है। मेले में आने वाले श्रद्धालू भी इस बात का विशेष ध्यान रखते है और मेला क्षेत्र के करीब तीन से चार किलोमीटर के क्षेत्र में न तो धूम्रपान करते है और न ही किसी को धूम्रपान करने देते हैं।
भोजन व्यवस्था
मुकाम मेले में आने वाले सभी श्रद्धालुओं के शुद्ध और सात्विक भोजन की निशुल्क व्यवस्था है। इसके लिए एक बड़ी भोजन शाला का निर्माण करवाया गया है जिसमें एक साथ एक हजार से भी अधिक लोगों के भोजन करने की व्यवस्था है। भोजनशाला में श्रद्धालुओं के लिए भोजन के साथ चाय, दूध आदि भी निशुल्क उपलब्ध करवाया जाता है।
Published on:
05 Mar 2019 11:42 am
बड़ी खबरें
View Allबीकानेर
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
