
एग्जाम फाेबिया से 40 बच्चे पहुंचे अस्पताल, 15 भर्ती...एक्सपर्ट बोले-आत्मविश्वास से दें परीक्षा
बीकानेर. यह तीन केस तो महज उदाहरण हैं। ऐसे कई विद्यार्थी हैं, जो इस समय एग्जाम फोबिया में जकडे हुए हैं। परीक्षा नजदीक आते ही उनकी दिनचर्या बदल जाती है और पढ़ाई को लेकर तनाव में आ जाते हैं। ऐसी बात नहीं है कि ये विद्यार्थी पढ़ाई में कमजोर हैं अथवा पाठ्यक्रम पूरा नहीं हुआ है। दरअसल, उन्हें अब यह लग रहा है कि परीक्षा में अच्छे अंकों के लिए और क्या प्रयास किए जाएं। इसी उधेड़बुन ने तनाव पैदा किया, जिससे उनका मन भटक रहा है। ऐसे विद्यार्थियों की नींद में भी व्यवधान होने लगा है। नतीजा है कि कई विद्यार्थी दवाइयां लेकर आगे की पढ़ाई जारी रख रहे हैं ताकि अच्छे अंक हासिल किए जा सकें।पीबीएम अस्पताल के मानसिक रोग विभाग में अब तक एग्जाम फोबिया की जड़कन में आए 15 विद्यार्थियों को भर्ती किया जा चुका है। उन्हें दो से चार दिन तक भर्ती रखा जाता है। साथ ही चिकित्सक उनकी काउंसलिंग भी कर रहे हैं। ताकि परीक्षा से पहले वे तनावमुक्त होकर परीक्षा दे सकें। इन 15 विद्यार्थियों के अलावा मानसिक रोग विभाग में विगत ढाई महीने में करीब 40 विद्यार्थी आउटडोर में दिखाने आ चुके हैं। इन सभी विद्यार्थियों की काउंसलिंग लेकर उनका इलाज किया गया है।
---प्रतियोगी परीक्षा के अभ्यर्थी भी आ रहे
मानसिक रोग विभाग में विद्यार्थियों के अलावा नौकरी के लिए प्रतियोगी परीक्षा देने वाले अभ्यर्थी भी आ रहे हैं। दिन-रात एक कर परीक्षा की तैयारी करने वाले इन अभ्यर्थियों की असल चिंता यह है कि कहीं पेपर लीक न हो जाए। यह सोच उन्हें तनाव की ओर ले जा रहे है।
विद्यार्थियों की मुख्य समस्याएं-परीक्षा नजदीक आने पर पढ़ाई में ध्यान नहीं लगता है।
-आलस्य आने लगता है।-दिनचर्या में बदलाव आने से तनाव होना।
-याददाश्त व आत्मविश्वास में कमी।-बेचैनी, घबराहट तथा चिड़चिड़ापन।
-शरीर में कंपन, दर्द तथा चक्कर आने लगते हैं।---
क्यों आ रहे हैं ऐसे लक्षण-परीक्षा का दबाव अत्यधिक होना।
-अभिभावकों की अच्छे अंक लाने की अपेक्षा।-पढ़ाई को लेकर किसी अन्य से चर्चा न होना।
-पाठ्यक्रम समय पर पूरा नहीं होना।- पढ़ा हुआ कुछ भी याद नहीं रहना।
-नोट्स तैयार होने में दिक्कत।
एक्सपर्ट व्यू : परीक्षा को बोझ नहीं मानेंयह सही है कि परीक्षा सीजन आते ही विद्यार्थी तनावग्रस्त होने लगते हैं। इससे बचने के लिए पाठ्यक्रम को छोटे-छोटे टुकड़ों में बांट कर तैयारी करनी चाहिए। एक साथ पांच से सात घंटे तक नहीं बैठना चाहिए। बीच-बीच में अंतराल लेने से दिमाग भी तरोताजा रहता है और सवालों के जवाब भी याद रहते हैं। खानपान का भी ध्यान रखना चाहिए। अगर भूखे रहेंगे तो शरीर में कमजोरी रहेगी और आलस्य आने लगेगा। परीक्षा को बोझ न समझ कर सही तरीके से पहले याद किए जाने वाले चैप्टर का चयन किया जाए। साथ ही आत्मविश्वास होना बेहद जरूरी है। जब तक आत्मविश्वास की कमी रहती है, याददाश्त कमजोर होती रहती है।
- डॉ. हरफूल विश्नाेई, मानसिक रोग विशेषज्ञ, पीबीएम अस्पताल
केस-1
सीमा (बदला हुआ नाम) कक्षा दसवीं में अध्ययनरत है। शुरू से ही वह पढ़ाई में होशियार है। उसका सपना है कि वह सैकंडरी परीक्षा में अच्छे अंक हासिल करे। वह शुरू से ही नियमित अध्ययन कर रही है। अब जब परीक्षा नजदीक आई, तो वह तनाव में आ गई। उसे मानसिक रोग चिकित्सक के पास ले जाना पड़ा। अब वह दवा लेकर पढ़ाई कर रही है।केस-2
राकेश (बदला हुआ नाम) सीनियर सैंकडरी परीक्षा की तैयारी कर रहा है। उस पर दबाव यह है कि वह अच्छे अंक हासिल कर नीट की तैयारी में जुट जाए। ताकि मेडिकल कॉलेज में प्रवेश हो सके। इस दबाव से वह तनाव में आ गया। अभिभावक उसे मानसिक रोग विभाग लेकर आए। अब वह दवा लेकर पढ़ाई में जुटा है।
केस-3
महेश (बदला हुआ नाम) के दसवीं और ग्यारहवीं में अच्छे अंक आए थे। उसने सीनियर सैकंडरी की परीक्षा की तैयारी भी टाइम टेबल तय करके शुरू की। इसके लिए उसने स्कूल के अलावा कोचिंग सेंटर का सहारा भी लिया। अब वह तनाव में आ गया है। उसकी नींद उड़ गई है और दवाइयां लेकर परीक्षा की तैयारी कर रहा है।
Published on:
18 Feb 2023 10:47 pm
बड़ी खबरें
View Allबीकानेर
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
