
किसान विरोध
लूणकरनसर. कस्बे में राजफैड के माध्यम से क्रय-विक्रय सहकारी समिति के खरीद केन्द्र पर सरसों व चने की ऑनलाइन खरीद की प्रक्रिया बंद करने के मुद्दे को लेकर मंगलवार को उपखण्ड कार्यालय पर किसानों ने विरोध प्रदर्शन किया।
कांग्रेस के पूर्व ब्लॉक अध्यक्ष लेखराम भादू के नेतृत्व में उपखण्ड अधिकारी डॉ. रतन कुमार स्वामी से मिले प्रतिनिधिमण्डल ने अवगत करवाया कि लूणकरनसर के खरीद केन्द्र पर तीन दिनों से ऑनलाइन खरीद का कार्य बंद है। इससे अपनी उपज की गिरदावरी ऑनलाइन करवाकर टॉकन से वंचित है। किसानों ने सरकार से दुबारा ऑनलाइन खरीद शुरू करने की मांग उठाई है। अन्यथा आंदोलन करने की चेतावनी दी है।
समर्थन मूल्य पर खरीद व्यापारियों के जरिए हो
श्रीडूंगरगढ़. प्रदेश में समर्थन मूल्य पर कृषि उपज की खरीद हरियाणा व पंजाब के पेटर्न पर आढ़त व्यापारियों के जरिए करने व कृषि जिंस की खरीद सीमा को पूरी तरह समाप्त करने की मांग अनाज मंडी व्यापार संघ ने मुख्यमंत्री से की है। व्यापार संघ अध्यक्ष श्याम सुन्दर पारीक ने पत्र में बताया कि सरकार समर्थन मूल्य पर किसानों की कृषि उपज चना, सरसों, गेहूं आदि मण्डियों में स्थापित सरकारी केन्द्रों पर खरीद शुरू कर रही है।
इसका ऑनलाइन पंजीयन होना शुरू हो गया है। आढ़त व्यापारी का मुख्य व्यापार किसानों द्वारा कृषि उपज मण्डी में विक्रय के लिए लाई गई कृषि जिंसों को नीलामी में बेचना व उस बिक्री पर मिलने वाला आढ़त ही व्यापार की आय का मुख्य स्रोत है। सरकार द्वारा समर्थन मूल्य पर सीधे किसानों से कृषि उपज खरीद करने से आढ़त व्यापारी का रोजगार छीनने व अपनी उधारी नहीं आने की स्थिति बन जाती है।
किसान भी समर्थन मूल्य पर फसल सरकारी एजेंसियों को आढ़त व्यापारी के जरिए ही बेच कर संतुष्ट रहता है। हरियाणा व पंजाब आदि कई राज्यों में सरकार आढ़त व्यापारी से समर्थन मूल्य पर कृषि जिंसों की खरीद करती है। इससे किसानों को भी व्यापारी से हमेशा जुड़ाव रहने से फसल बेचने में सुविधा होती है। व्यापारी के हितों को ध्यान में रखते हुए प्रदेश में भी हरियाणा व पंजाब की तर्ज पर समर्थन मूल्य पर कृषि जिंसों की खरीद शुरू की जाए ताकि किसान व्यापारी व खरीद एजेंसियों को भी खरीद केन्द्र पर किसी प्रकार की असुविधा न हो।
इसी प्रकार किसानों की भी कृषि उपज की समर्थन मूल्य पर खरीद सीमा खत्म की जानी चाहिए। 25 क्ंिवटल की खरीद की बाध्यता से किसान की करीब 75 प्रतिशत फसल बच जाती है। जो खुले बाजार में कई बार कम भावों में मजबूर होकर बेचनी पड़ती है।
Published on:
28 Mar 2018 09:45 am
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