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परम्परागत खेती के साथ नवाचार, धोरों पर उगा दिए प्याज और टमाटर, देखिये वीडियो

प्रगतिशील किसान की पहल, परंपरागत के साथ उन्नत कृषि

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Farming innovation

रामेश्वरलाल भादू/छत्तरगढ़. क्षेत्र की धोरों की धरती पर कुछ दशक पूर्व यहां पानी के अभाव में लोग इस क्षेत्र में आने से कतराते थे। अब उसी धरती को इंदिरा गांधी मुख्य नहर से कायाकल्प कर दिया है। अब यहां का प्रगतिशील किसान परम्परागत खेती के साथ नवाचार भी अपना रहा है तथा उन्नत खेती कर आयवद्र्धन के साथ अन्य किसानों के लिए भी नजीर बन रहा है।

छतरगढ़ की रोही के चक 3 सीएचडी में धोरों पर एक खेत में रेतीली जमीन पर अब तक किसान परम्परागत गेहूं, ग्वार, मूंगफली, ईसबगोल आदि की खेती कर रहे थे। अब क्षेत्र के खेतों में फलों व सब्जी की बहार भी देखने को मिल रही है। इस रेतीली धरती पर विभिन्न फलों के साथ प्याज के बीज सहित टमाटर व मिर्ची के पौधे लगाकर किसान दोगुनी आय प्राप्त कर रहे हैं।

चक तीन सीएचडी खेत मालिक मनीराम व कुम्भाराम मेघवाल ने बताया कि बाजार में सब्जियों के बढ़ते भाव के देखते हुए फलों, प्याज के बीज, मिर्च, टमाटर, गोभी, गाजर आदि सब्जियों के पौधे लगाए। अब आसानी से सब्जियां व बीज होने लगे है्र्र। किसान मेघवाल ने बताया कि आगामी समय में अनार, चकुंदर, पपीता सहित अन्य फल व सब्जियां लगाने की योजना है। उन्होंने रासायनिक खाद व कीटनाशकों के स्थान पर केंचुआ प्लांट तैयार कर देशी खाद का उपयोग कर रहे हैं। इसके लिए रोही में केंचुआ प्लांट लगाया है। इसमें गोमूत्र, गोबर व राख का उपयोग कर उपज ले रहे हैं। फसल को कीटों से बचाने के लिए गोमूत्र व राख का छिड़काव किया जाता है।

प्याज के लिए उपयुक्त
&छतरगढ़ क्षेत्र प्याज की खेती के लिए उपयुक्त जगह है। यदि सरकार व कृषि विभाग इस क्षेत्र के किसानों को नवाचार के लिए सब्सिडी दी जाए तो किसानों का रुझान सब्जियों की ओर होगा। सब्जियों की खेती से क्षेत्र के किसानों से प्रेरणा लेनी चाहिए।
डॉ. रामकिशोर मेहरा,
सहायक निदेशक, कृषि विभाग