
बीकानेर. राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केन्द्र में गुरुवार को स्थापना दिवस मनाया गया। इस दौरान कई कार्यक्रम हुए। ऊंटों की दौड़, नृत्य आदि प्रतियागिताएं आर्कषण का केन्द्र रहीं। कार्यक्रम में अतिथि के रूप में शामिल हुए केन्द्रीय शुष्क अनुसंधान संस्थान जोधुपर के डॉ. ओपी यादव ने कहा कि ऊंटनी दुहने की प्रतियोगिता में अधिक दूध निकालना, इसकी भरपूर दुग्ध उत्पादन क्षमता को इंगित करता है।
ऊंटनी का दुधारू जानवर की दृष्टि से चयन करना होगा। इस प्रजाति तथा संबद्ध समुदाय के विकास एवं संरक्षण के लिए जरूरी है कि इसकी आर्थिक उपयोगिता को सामने लाया जाए।
परिचर्चा में रखे विचार
उष्ट्र दूध का संवर्धन एवं विपणन से आय बढ़ोतरी विषयक दो दिवसीय परिचर्चा रखी गई। इसमें सिरोही, जैसलमेर के टीएसपी क्षेत्रों एवं उदयपुर, बीकानेर के गांवों के 46 उष्ट्र पालक भाग ले रहे हैं। इससे पूर्व मिल्क प्रतियोगिता, ऊंट नृत्य, ऊंट दौड़ के साथ विभिन्न संस्थानों ने प्रदर्शनी भी लगाई।
औषधीय उपयोगिता
डॉ. वीएन पाटिल ने कहा कि मानवीय स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए ऊंटनी के दूध पर अनुसंधान किया गया है। इसमें मधुमेह, टीबी, ऑटिज्म आदि रोगों में दूध की औषधीय उपयोगिता को सिद्ध किया जा चुका है। कार्यक्रम में जिला कलक्टर डॉ. नरेन्द्र कुमार गुप्ता, डॉ. बीएस प्रकाश, डॉ. एके पुरोहित, प्रो. एके गहलोत ने विचार रखे। इस मौके पर करभ दूध पाउडर लॉन्च किया गया।