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बैंक मैनेजर की आड़ में पुलिस ने अटकाई धोखाधड़ी की जांच

बैंक में खाता खोलकर लाखों का लेन-देन कर आमजन से धोखाधड़ी करने वालों के गिरेबान तक एक साल बाद भी पुलिस नहीं पहुंच सकी है।

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fraud case

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बीकानेर. बैंक में खाता खोलकर लाखों का लेन-देन कर आमजन से धोखाधड़ी करने वालों के गिरेबान तक एक साल बाद भी पुलिस नहीं पहुंच सकी है। पुलिस ने बैंक मैनेजर के सेवानिवृत होने का बहाना कर जांच आठ माह से अटका रखी है, जो अभी तक भी सेवानिवृत मैनेजर को नहीं ढूंढ पाई।

वहीं पीडि़त धोखाधड़ी के मामले में न्याय के लिए दर-दर भटक रहा है। पीडि़तों को आयकर विभाग ने लाखों रुपए जमा कराने का नोटिस जारी कर रखा है। इन हालातों में पीडि़त पसोपेश में है आखिर वे करें तो क्या करें।

यह है मामला
मुरलीधर व्यास कॉलोनी निवासी सुनील पुत्र कन्हैयालाल सोनी के नाम से स्टेशन रोड स्थित बैंक ऑफ बड़ौदा में वर्ष २०१०-११ में खाता खोला गया। खाता खोलने के दौरान न तो वास्तविक सुनील की फोटो और ना ही हस्ताक्षर है। इसके खाते से गंगाशहर की आरएस क्रेडिट प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के संचालकों ने बैंक अधिकारियों व कर्मचारियों से मिलीभगत कर ७९ लाख ४१ हजार ४६५ रुपए का लेन-देन किया।

आयकर विभाग ने स्टेशन रोड स्थित बैंक ऑफ बड़ौदा में हुए ट्रांजेक्शन के लिए ६३ लाख ५४ हजार ५६० रुपए की वसूली निकाली है। जिसे जमा कराने का नोटिस जारी किया है। पुलिस ने पीडि़त की रिपोर्ट पर आरएस क्रेडिट प्रालि एमएस दुग्गड़ मार्ग गंगाशहर के मालिक, स्टेशन रोड़ स्थित बैंक ऑफ बड़ौदा प्रबंधक, बैंक कर्मचारी धर्मचंद बोथरा, विनोद कुमार सहित अन्य लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया।

पत्नी के नाम भी निकली वसूली : पीडि़त सुनील सोनी की पत्नी सुमित्रा के नाम से भी स्टेशन रोड स्थित आइसीआइसीआइ बैंक में फर्जी खाता खोलकर लाखों रुपए का ट्रांजेक्शन हुआ है। आयकर विभाग ने ७४ लाख ६५ हजार ११० रुपए की वसूली निकाली। विदित रहे कि सुनील की पत्नी सुमित्रा का निधन एक नवंबर-२०१६ को ही हो गया था, जबकि नोटिस २०१७ में जारी किया गया है। इसी तरह एक अन्य मामला जुगलकिशोर भारती की ओर से भी कोटगेट थाने में दर्ज कराया गया।

चल रही है जांच
जिसकी निशानदेही से बैंक में खाते खुले, उसके नमूना हस्ताक्षर एफएसएल भेजे हैं। मैनेजर का रिकॉर्ड बैंक हैड ऑफिस से मंगवाया है। बैंक मैनेजर सेवानिवृत होने से उसका स्थायी पता नहीं मिल रहा है। बैंक खाते २७ मार्च-२००९ में खुले और लेन-देन हुआ। ये खाते खुलने, लेन-देन से किस-किस को फायदा हुआ। यह सब जांच के विषय है, जिन पर जांच चल रही है।
वेदप्रकाश लखोटिया,सीआइ कोटगेट