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गीता जयंती महोत्सव में संतों के प्रवचन

गंगाशहर. उदयरामसर मार्ग स्थित मुरली मनोहर धोरे पर रविवार को दस दिवसीय गीता जयंती महोत्सव शुरू हुआ। पहले दिन आनंद आश्रम के संत नवलराम ने स्वामी रामसुखदास महाराज की ओर से रचित गीता पर टीका साधक संजीवनी के प्रथम व द्वितीय अध्याय पर प्रवचन दिया। रामधाम खेडापा के उत्तराधिकारी संत गोविन्दराम शास्त्री ने भक्त चरित्र करुणासागर की रसमयी वाणी में व्याख्या की। उन्होंने कहा कि भागवत चर्चा में व्यक्ति को अद्भुत आनंद की अनुभूति होती है।

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Gita Jayanti Festival

Gita Jayanti Festival


गंगाशहर. उदयरामसर मार्ग स्थित मुरली मनोहर धोरे पर रविवार को दस दिवसीय गीता जयंती महोत्सव शुरू हुआ। पहले दिन आनंद आश्रम के संत नवलराम ने स्वामी रामसुखदास महाराज की ओर से रचित गीता पर टीका साधक संजीवनी के प्रथम व द्वितीय अध्याय पर प्रवचन दिया। रामधाम खेडापा के उत्तराधिकारी संत गोविन्दराम शास्त्री ने भक्त चरित्र करुणासागर की रसमयी वाणी में व्याख्या की। उन्होंने कहा कि भागवत चर्चा में व्यक्ति को अद्भुत आनंद की अनुभूति होती है।

रामधाम खेडापा के आचार्य पुरुषोत्तमदास महाराज ने आयोजन का महत्व बताया। धोरे के संत रघुवीर महाराज ने कहा कि महोत्सव का समापन १८ दिसंबर को गीता जयंती पर होगा। महोत्सव में सुबह ११:३० बजे से शाम ४:३० बजे तक संतों और विद्वानों के प्रवचन होंगे। उन्होंने कहा कि महोत्सव स्थल पर आने के लिए सत्संग समिति, मुरलीमनोहर धोरे भीनासर की ओर से शहर के विभिन्न स्थानों पर नि:शुल्क बसों की व्यवस्था की गई है।

रांकाजी महाराज की जयंती मनाई
बीकानेर. अखिल भारतीय रांकावत महासभा की ओर से रविवार को रांकावत भवन में रांकाजी महाराज की ७२८वीं जयंती समारोहपूर्वक मनाई गई। कार्यक्रम में रांकावत समाज सभा के अध्यक्ष हनुमानदास स्वामी, सुभाष स्वामी व विष्णुदत्त स्वामी ने रांकाजी के आदर्श, विचार एवं आध्यात्मिकता पर प्रकाश डाला। सामाजिक एकता व बदलते परिपेक्ष्य में शिक्षा, आर्थिक आधार व युवाओं में स्वावलम्बन संसाधनों से विकासोन्मुखता पर प्रबुद्धजनों ने विचार रखे। इस अवसर पर चुन्नीलाल स्वामी, द्वारकाप्रसाद, गणेशदास, ओमप्रकाश, महेन्द्र चाडा, किसनलाल व श्यामसुन्दर ने सामाजिक एकता पर बल दिया।