
इस स्कूल में कमरों की कमी से पेड़ों के नीचे बैठकर पढ़ना मजबूरी
भागीरथ ज्याणी
बज्जू. सरकारी स्कूलों में सुविधा बढ़ाने लिए राज्य सरकार कई योजनाओं के माध्यम से पैसा पानी की तरफ बहा रही है। वहीं बीकानेर जिले के बज्जू उपखंड के सीमावर्ती बरसलपुर गांव के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में कक्षा-कक्ष के अभाव में बच्चे पेड़ों व बरामदों के नीचे पढ़़ने को मजबूर है। इनकी पढाई तपस्या से कम नहीं है। स्कूल के बच्चे हर मौसम में पेड़ों के नीचे अध्ययन करने को मजबूर है।
जानकारी के अनुसार बरसलपुर के इस राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में कक्षा 1 से 12 तक करीब 350 बच्चों का नामांकन है, लेकिन कक्षा-कक्षोंं का अभाव होने के कारण स्कूल स्टाफ को मजबूरन पेड़ों व बरामदों में अध्ययन करवाना पड़ता है। मजेदार बात यह है कि बीकानेर जिले से ही शिक्षा मंत्री डॉ. बीड़ी कल्ला आते हैं और ऊर्जा मंत्री भंवरसिंह भाटी भी इसी क्षेत्र के विधायक हैं। वर्षों से इस स्कूल के हाल-बेहाल है। इस समस्या को लेकर ग्रामीणों ने कई बार आंदोलन भी किया, लेकिन कोई राहत नहीं मिली।
घट रहा नामांकन
ग्रामीणों ने बताया कि विद्यालय में सुविधाओं के अभाव में अब नामांकन घट रहा है। हालांकि विद्यालय में दो साल पहले 310 बच्चे थे और पिछले साल 408 बच्चों का स्कूल में नामांकन था लेकिन स्टाफ व कक्षा कक्ष की की कमी से इस बार 50 बच्चे कम हुए है। ग्रामीणों ने बताया कि अब स्कूल में रिक्त पदों को भर दिया जाए और कक्षा-कक्ष बन जाए तो बच्चों की संख्या 600 हो सकती है। स्कूल भवन करीब 20 वर्ष से ज्यादा पुराना है ।
खुले में बैठना मजबूरी
बरसलपुर निवासी भीम आर्मी के जिलाध्यक्ष कैलाश चंदेल ने बताया कि स्कूल में मात्र छह कक्ष है। ऐसे में बच्चों को सर्दी, गर्मी के मौसम में भी पेड़ों के नीेचे व बरामदों में बैठना पड़ता है। कई बार तो आंधी व तेज हवाओं से पेड़ की शाखाएं भी गिर जाती है और बारिश होने पर बच्चे भीग जाते हैं। इस दौरान कई घंटों तक बरामदों में खड़े रहना पड़ता है। गर्मी के दिनों में जहरीले जानवरों के निकलने से बड़ा हादसा हो सकता है।
ऊर्जा मंत्री ने किया था वादा पर भूले
सामाजिक कार्यकर्ता अप्पूराम रेन, पोकरराम व कैलाश चंदेल ने बताया कि करीब एक-डेढ़ वर्ष पहले ऊर्जा मंत्री भंवरसिंह भाटी जब प्रशासन गांवों के संग अभियान के तहत बरसलपुर पहुंचे तो ग्रामीणों ने समस्या से अवगत करवाया था। इस पर 12 बीघा जमीन का पट्टा नए भवन के लिए शिविर में उपलब्ध करवाया और जल्द भवन के लिए बजट की बात कही, लेकिन इसके बाद आज तक ग्रामीण बजट व काम शुरू होने का इंतजार कर रहे हैं।
18 पद स्वीकृत, चार कार्यरत
ग्रामीण मुकेश चंदेल व पूनमचंद ने बताया कि विद्यालय में 18 पद स्वीकृत है, लेकिन मात्र 4 पद ही भरे हैं। इनमें भी दो जनों को ऑफिस कार्य, डाक भेजना, पोषाहार वितरण सहित अन्य कार्य में लगना पड़ता है। ऐसे में दो जनों के भरोसे 12 कक्षाओं का संचालन करना काफी मुश्किल है।
एक कक्ष में दो कक्षाएं
ग्रामीण विनोद सोनी व नरेश ने बताया कि स्कूल में वर्तमान में छह कक्ष ही सही हालत में है। इसमें एक कक्ष में कार्यालय तो पांच कक्षा कक्ष है। कक्षा कक्ष की कमी से दो-दो कक्षाएं एक साथ बिठाई जाती है। वहीं एक कक्ष में लैब व अन्य कागजात है और तीन कक्षा वर्षो पुराने कमरे हैं, जो जर्जर हो चुके हैं।
Updated on:
30 Dec 2022 06:29 pm
Published on:
30 Dec 2022 12:40 am
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