
ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर
प्रदेश के रेगिस्तानी इलाके वाले पांच जिले सौर ऊर्जा उत्पादन के लिए देश में सबसे बेहतर जगह बनने जा रहे हैं। एेसा गुजरात के बनासकांठा से पंजाब के मोगा तक बनने वाले ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर यानी इलेक्ट्रोनिक्स कॉरिडोर के बनने से होगा। यह कॉरिडोर बीकानेर सहित अजमेर, चित्तौडग़ढ़, नागौर, जोधपुर आदि जिलों से गुजरेगा।इलेक्ट्रोनिक्स कॉरिडोर की 8 हजार केवी की मुख्य लाइन बिछाने का काम जोरों से चल रहा है।
इस पर चार सब स्टेशन भी बनने शुरू हो गए हैं। यह कॉरिडोर अगले साल अगस्त तक बनकर तैयार हो जाएगा। इसके बाद प्रदेश में उत्पादित सौर ऊर्जा से न केवल उत्तर भारत, बल्कि पूरा देश रोशन हो सकेगा। अभी तक प्रदेश में 740 केवी की भाखरा विद्युत लाइन सबसे बड़ी विद्युत लाइन है, जबकि ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर की लाइन इससे कई गुणा 8 हजार केवी की बन रही है।
सौर ऊर्जा के लिए आएंगे
प्रदेश में सौर ऊर्जा उत्पादन की अनुकूलता के बावजूद बड़े निवेशक नहीं आ रहे थे। अभी जो सौर ऊर्जा का उत्पादन हो रहा है, उसका केवल घरेलू उपयोग हो पा रहा है। अतिरिक्त ऊर्जा को किसी भी अन्य राज्य को नहीं दे पा रहे हैं। ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर बनने के बाद मोगा में नेशनल एनर्जी पार्क तक ऊर्जा पहुंचेगी। वहां से उत्तर भारत के साथ पूरे देश में वितरित की जा सकेगी। साथ ही सौर ऊर्जा प्लांटों से ऊर्जा लेने के लिए पांच जीएसएस इस लाइन पर बनेंगे। एेसे में निवेशक यहां ऊर्जा उत्पादन के लिए अपने प्लांट लगा सकेंगे।
एक साल और लगेगा
एनर्जी कॉरिडोर का काम तेजी से चल रहा है। यह प्रोजेक्ट अगस्त-2018 में बनकर तैयार हो जाएगा। इसके साथ ही मुख्य लाइन पर बनने वाले जीएसएस के माध्यम से बिजली लेनी शुरू कर दी जाएगी।
इलेक्ट्रोनिक्स कॉरिडोर पर एक नजर
- गुजरात के बनासकांठा से मुख्य लाइन शुरू होगी, जो राजस्थान के चित्तौडग़ढ़, अजमेर, नागौर, बीकानेर, हनुमानगढ़ होकर पंजाब के मोगा तक जाएगी।
- मुख्य लाइन में सौर ऊर्जा को डाला जा सकेगा। इसके लिए पांच जीएसएस बनासकांठा, अजमेर, जोधपुर, बीकानेर और मोगा में बनाए जाएंगे।
- बीकानेर के जामसर में खादानों की जगह पर जीएसएस स्थापित किया जा रहा है। जोधपुर जिले में फलौदी क्षेत्र में बड़ला सौलर प्लांट से भी जीएसएस के माध्यम से मुख्य लाइन में बिजली दी जाएगी।
Published on:
22 Aug 2017 12:25 pm
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