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किसान को मूंगफली करेगी निहाल, भरपूर तेल वाली यह नई किस्म गिरनार

कई सालों की मेहनत के बाद निदेशालय ने यहां के वातावरण और मिट्टी के अनुकूल ज्यादा तेलीय मूंगफली के बीज तैयार करने में सफलता प्राप्त कर ली है।

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किसान को मूंगफली करेगी निहाल, भरपूर तेल वाली यह नई किस्म गिरनार

किसान को मूंगफली करेगी निहाल, भरपूर तेल वाली यह नई किस्म गिरनार

बीकानेर. लंबे समय के बाद किसानों को मूंगफली की नई किस्म खेतों में बोने के लिए मिलेगी। मूंगफली अनुसंधान निदेशालय ने नई किस्म गिरनार को तैयार किया है। जिसका किसानों को बीज देने के लिए इस बार बुवाई भी की है। गिरनार मूंगफली में तेल की मात्र अभी चलन वाली मूंगफली से तीन से पांच फीसदी अधिक है। जिससे किसान का उत्पादन बढ़ेगा और उपज का बाजार में मूल्य भी ज्यादा मिलेगा।बीकानेर समेत प्रदेश में काश्तकार दशकों पुरानी मूंगफली की किस्मों की ही बुवाई कर रहे है। अब कई सालों की मेहनत के बाद निदेशालय ने यहां के वातावरण और मिट्टी के अनुकूल ज्यादा तेलीय मूंगफली के बीज तैयार करने में सफलता प्राप्त कर ली है। इन किस्म को मूंगफली पकने में भी कम समय लेती है। सिंचाई की जरूरत भी कम पड़ती है।

मूंगफली की पन्द्रह तरह की किस्में

मूंगफली अनुसंधान निदेशालय के अनुसार राजस्थान में मूंगफली की पन्द्रह तरह की किस्में हैं। जानकारी के अभाव में काश्तकार 1970 से 90 के दशक की जारी 10-12 किस्म की मूंगफली की बुवाई करते हैं। निदेशालय ने चलन वाली किस्मों पर अनुसंधान कर गिरनार 4-5 किस्म तैयार की है। इसमें हाईड्रोलिक एसिड की मात्रा 70 से 80 फीसदी है। इससे गोटे में तेल की मात्रा करीब 53 प्रतिशत से अधिक रहती है। जबकि अन्य किस्मों की मूंगफली में 48 से 50 प्रतिशत तेल निकलता है।

कम समय में पककर तैयार

प्रचलन वाली किस्मों की मूंगफली को पककर तैयार होने में पांच माह अथवा 140 दिन लगते हैं। सिंचाई पानी भी ज्यादा जरूरत पड़ती है। नई गिरनार 4-5 किस्म 110 दिनों में ही पककर तैयार हो जाती है। इसे प्रचलन वाली किस्मों के मुकाबले कम सिंचाई की आवश्यकता रहती है।निदेशालय के निदेशक डॉ. एसके बेरा ने अनुसंधान कर इसे तैयार किया है।

किसानों को गिरनार से फायदा

किसानों अब 1970 से 90 के दशक की किस्म की मूंगफली को छोड़कर नई किस्म गिरनार 4-5 की बुवाई कर सकेंगे। इस किस्म में तेल की मात्रा अधिक है। सिंचाई पानी भी कम देना पड़ता है। वजन ज्यादा और तेल ज्यादा होने से भाव भी अच्छे मिलेंगे।- डॉ. नरेन्द्र कुमार, प्रभारी अधिकारी मूंगफली क्षेत्रीय अनुसंधान केन्द्र

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