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दिल हो रहा कमजोर, युवाओं के मुकाबले बुजुर्ग मजबूत दिल वाले

- भारत में हार्ट अटैक से मरने वाले 10 में से चार की उम्र 40 वर्ष तक - कोरोना के बाद दिल के रोगियों में 16 प्रतिशत की बढ़ोतरी

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दिल हो रहा कमजोर, युवाओं के मुकाबले बुजुर्ग मजबूत दिल वाले

दिल हो रहा कमजोर, युवाओं के मुकाबले बुजुर्ग मजबूत दिल वाले

जयप्रकाश गहलोत

बुजुर्गों के मुकाबले अब युवाओं का दिल कमजोर हैं। हार्ट अटैक के शिकार अत्यधिक युवा ही हो रहे हैं, जिनकी उम्र 40 साल से कम हैं। पीबीएम अस्पताल से संबद्ध हल्दीराम मूलचंद कार्डियो वेसक्युलर एंड रिसर्च सेंटर में हार्ट की बीमारी से ग्रसित होकर युवा अधिक पहुंच रहे हैं। हॉस्पिटल में रोजाना 450-500 मरीजों की ओपीडी में युवा 68 फीसदी होते हैं। जो चिंता की बात है। यह संख्या डराने के साथ-साथ चेताने वाली भी है।

चिकित्सकों के मुताबिक युवाओं में ड्रग्स व धूम्रपान की लत दिल पर आघात कर रही है। युवाओं का दिल तनाव व खुशी दोनों को झेल नहीं पा रहा। कोरोना के बाद दिल के रोगियों में 16 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हुई है। जिसे पोस्ट कोविड असर के रूप में देखा जा रहा है। भारत ही नहीं देशभर में एक-तिहाई लोगों की मौत दिल से जुड़ी बीमारियों से हो रही है। पिछले चार-पांच साल से दिल के रोगियों में बुजुर्गों के साथ-साथ युवा बढ़ रहे हैं।

जनरल के आंकड़े डरावने

चिकित्सकों की दिल की बीमारियों पर की गई रिसर्च चिकित्सा जगत के रिसर्च जनरल में छपी। इसमें दिल से होने वाली मौतों की तस्वीर साफ कर दी। 2015 तक भारत में 6.2 करोड़ लोग दिल संबंधी बीमारियों की चपेट में थे। इसमें से 2.3 करोड़ लोगों की उम्र 40 साल से कम थी। ऐसी ही एक स्टडी 2018 में भी सामने आई। तब साइंस जनरल लैंसेट ने दिल की बीमारियों से जुड़े 1990 से 2016 तक के आंकड़े रखे। स्टडी में दावा किया गया था कि 1990 में भारत में होने वाली कुल मौतों में से 15.2 प्रतिशत का कारण दिल की बीमारी था। वर्ष 2016 में यह आंकड़ा बढ़कर 28.1 प्रतिशत हो गया। 2016 में भारत में 100 में 28 मौत का कारण दिल की बीमारी माना गया। विश्व स्वास्थ्य संगठन की मानें तो 2019 में दुनियाभर में 1.79 करोड़ मौतें दिल की बीमारियों से हुई। इनमें से 85 प्रतिशत मौत केवल हार्ट अटैक और हार्ट स्ट्रोक से हुई थी।

हर छठे मरीज की मौत

हार्ट हॉस्पिटल के आंकड़ों के मुताबिक यहां रोजाना 450-500 मरीज ओपीडी में आते है। इनमें से 30-35 मरीज रोज भर्ती किए जाते है। हर तीसरा मरीज हार्ट अटैक के कारण भर्ती हो रहा है। युवाओं में हार्ट अटैक का अनुपात 2015 में 18 से 20 प्रतिशत था। अब बीते चार सालों में 35-40 प्रतिशत हो गया है। प्रतिदिन भर्ती होने वाले मरीजों में से 20-25 प्रतिशत की मौत हो जाती है। यानि हर दिन पांच मरीजों की जान जा रही है।

दिन कमजोर होने की वजह- जंक फूड, फास्ट फूड, पैकेज्ड फूड, धूम्रपान, खान-पान, आलस्य, ड्रग्स एडिक्शन, शराब व अन्य नशा।

यह उपचार हर दिन

- एंजियोग्राफी 15-20

- एंजियोप्लास्टी 6-8

हार्ट हॉस्पिटल में यह सुविधा

- एंजियोग्राफी

- एंजियोप्लास्टी- स्टेंडिंग

- प्राइमरी एंजियोप्लास्टी- हृदय अटैक के मरीज की एंजियोप्लास्टी

- पेसमेकर प्रत्यारोपण- कार्डियक अरेस्ट का प्रत्यारोपण

- एआइसीबी- सीआरटी-बी

- हृदय छेद को बंद करना। डिवाइस क्लोजर एएसबी-पीडीए- एंजियोग्राफी की ओर से वॉल्व प्रत्यारोपण

धूम्रपान व नशा प्रमुख कारणयुवाओं में प्रमुख कारण धूम्रपान का सेवन है, जिसके चलते हृदय संबंधी बीमारी बढ़ रही है। 25 से 35 साल की उम्र के युवा अटैक के शिकार हो रहे है। भर्ती होने वाले मरीजों में 30-35 प्रतिशत में अटैक हो रहे है। इसमें 20 प्रतिशत की मौत हो रही है जो चिंता की बात है। युवाओं को अपनी लाइफ स्टाइल बदलनी होगी। भारत में हार्ट से मरने वाले 10 से से चार मरीजों की उम्र 40 हैं।

डॉ. पिन्टू नाहटा, विभागाध्यक्ष हार्ट हाॅस्पिटल