
यहां पाताल में भी गूंजता है हर-हर महादेव...
बीकानेर. छोटी काशी के नाम से मशहूर बीकानेर शहर में रियासतकाल से शताब्दियों पुराने शिवालय हैं। कई शिवालयों में स्थापित शिवलिंग अपनी विशेष बनावट, आकार और िस्थति के अनुसार प्रसिद्ध हैं। शहर में कई शिवलिंग जहां भूमि से नीचे स्थापित हैं, वहीं कई शिवालय दूसरी और तीसरी मंजिल सहित खुले आकाश के नीचे भी हैं। पाताल वाले शिवालयों पर विशेष स्टोरी, उनका ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व।
यहां केवल पार्वती के साथ हैं महादेव
शिवालयों में भगवान शिव परिवार की प्रतिमाएं स्थापित रहती हैं। नत्थूसर गेट के बाहर िस्थत बड़ा गणेश मंदिर परिसर में िस्थत पातालेश्वर महादेव मंदिर में भगवान शिव के साथ केवल माता पार्वती है। गणेश, कार्तिकेय की प्रतिमाएं नहीं हैं। मंदिर पुजारी लालचंद स्वामी के अनुसार यह मंदिर करीब दो शताब्दी पुराना है। पातालेश्वर महादेव का सालभर अभिषेक-पूजन का क्रम चलता रहता है। प्रदोष के दिन विशेष अभिषेक-पूजन होता है। शिवलिंग जमीन से करीब पन्द्रह फीट नीचे पाताल में स्थापित है। पातालेश्वर महादेव के प्रति श्रद्धालुओं की विशेष आस्था व भक्ति है।
सुयोग्य वर की प्राप्ति के लिए लड़कियां करती हैं यहां पूजन
जस्सोलाई पार्क के पास िस्थत पातालेश्वर महादेव मंदिर करीब तीन शताब्दी प्राचीन है। यहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में बालिकाएं व युवतियां सुयोग्य वर की कामना को लेकर माता पार्वती और पातालेश्वर महादेव का पूजन करती हैं। मंदिर पुजारी सीताराम सेवग के अनुसार यहां मां पार्वती की प्रतिमा के दो हाथ है व माता पार्वती हाथ जोड़े तपस्या स्वरूप में हैं। बालिकाएं मांग, मेहन्दी, श्रृंगार सामग्री अर्पित कर पूजन करती हैं। बालिकाएं पार्वती के मांग भरती है व मेहन्दी मांडणा लगाती है। मंदिर में भगवान गणेश, कार्तिकेय, पार्वती व महादेव की प्रतिमाएं स्थापित हैं। शिवलिंग जमीन से करीब दस फीट नीचे स्थापित है।
यहां पाताल में केवल विराजते हैं भगवान शिव
उदयरामसर रोड आसोपा धोरा पर स्थित पातालेश्वर महादेव दशकों से श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना हुआ है। धोरे पर जमीन से करीब तेरह फीट नीचे स्थापित है शिवलिंग। मंदिर बहुत ही छोटा व संकरा है। यहां केवल शिवलिंग है। भगवान गणेश,माता पार्वती, कार्तिकेय की प्रतिमाएं नहीं हैं। पुजारी रामेश्वर के अनुसार पातालेश्वर महादेव के प्रति लोगों की अटूट आस्था है। सालभर यहां लोगों के दर्शन पूजन का क्रम चलता रहता है। सावन में विशेष अभिषेक पूजन होते हैं। इस मंदिर के पास एक और शिव मंदिर है।
Published on:
21 Jul 2023 06:37 pm
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