
vegetables
सावधान! जिन हरी सब्जियों तथा फलों को ताजा और स्वास्थ्यवर्धक मानकर आप खा रहे हैं। उसकी हकीकत सुनेंगे तो आपके पैरों तले से जमीन खिसक जाएगी। ये हरी-हरी सब्जियां शहर से निकलने वाले मल-मूत्र और रसायन युक्त गंदे पानी से सिंचाई कर उगाई जा रही हैं।
इतना ही नहीं यदि आपने हरी सब्जियों को उगाने की प्रक्रिया को देख लिया और समझ लिया तो आप हरी सब्जियों को खाने से भी तौबा ही कर लेंगे।बीकानेर शहर के आस-पास सैकड़ों बीघा भूमि पर गंदे पानी से हरी सब्जियों के नाम पर जहर उगाया जा रहा है। राजस्थान पत्रिका टीम ने शहर के आस-पास उगाई जाने वाली हरी सब्जियों के बागानों का सर्वे किया तो एक बड़ा कड़वा सच निकलकर सामने आया।
शहर से जो मल.मूत्र भरा सीवरेज का गंदा पानी बाहर निकलता है। उससे खेतों में हरी सब्जियां उगाई जा रही हैं।इन सब्जियों को हम स्वास्थ्यवर्धक मानकर खा रहे है। इतना ही नहीं सड़ांध मारते इस गंदे पानी से सैकड़ों बीघा भूमि पर अवैध ढंग से हरी सब्जियों का कारोबार चल रहा है। इसके लिए भी बाकायदा सब्जी माफिया प्रति बीघा के हिसाब से लाखों रुपए में ठेका देते हैं।
यह सारा गौरखधंधा खुलेआम जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की नाक के नीचे चल रहा हैं। हरी सब्जियों के नाम पर लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ हो रहा हैए फिर भी जिम्मेदार लोग मूकदर्शक बनकर बैठे है और कहीं पर कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं।भगवान ना करें किसी दिन ये जहरीली सब्जियां खाने से कोई बड़ा हादसा हुआ तो जिम्मेदारों का जवाब देना भारी हो जाएगा।
यहां उगाई जाती है गंदे पानी से सब्जियां शहर के रंगोलाई, वल्लभ गार्डन, कोटड़ी रोड, श्रीरामसर, किश्मीदेसर, नोखा रोड सहित एक दर्जन से अधिक क्षेत्रों में सैकड़ों बीघा भूमि पर गंदे पानी से हरी सब्जियां तैयार की जाती हैं।
प्रति बीघा दो लाख रुपए सालाना का ठेका
सूत्रों की माने तो वल्लभ गार्डन के पास जो खेत हैए वहां पर गंदे पानी से सब्जियां उगाने के लिए पूरा कारोबार सेटिंग से चलता है। वहां गंदे पानी की डिग्गियों और नालों से गंदा पानी लेकर सब्जियां उगाई जा रही है। कई स्थानों पर तो डिग्गियों में जाने वाले गंदे पानी के बड़े नालों को तोड़कर खेतों में ही होद बनाए हुए हैं। इन होदों से पंपिग सेट लगाकर गंदे पानी को आगे खेतों की क्यारियों तक पहुंचाया जाता है।जिससे हरी सब्जियां पैदा की जाती है। इतना ही नहीं खेत मालिक सब्जियां उगाने के लिए मजदूरों को प्राइवेट ठेका देते हैं। यह ठेका दो लाख रुपए प्रति बीघा सालाना तक होता है। वहीं श्रीरामसर, किश्मीदेसर, नोखा रोड पर गंदे नालों के पानी को प्लास्टिक कट्टे लगाकर उनका रूख मोड़ दिया जाता है और जितने पानी की जरुरत होती है। उसी हिसाब से गंदे पानी को खेतों की क्यारियों तक पहुंचाया जाता है। जब पानी की जरुरत नहीं होती तो कट्टे हटा दिए जाते हैं। गंदे पानी के साथ आने वाले प्लास्टिक और कचरे को हटाने के लिए जालियां लगा रखी हैं।
इनकी होती पैदावार
पत्ता गोभी, फूल गोभी, लौकी, खीरा, मूली, हरा प्याज, पालक, धनियां आदि हरी सब्जियां उगाई जाती हैं।
शिकायत पर कार्रवाई
प्रदूषित पानी से उगाई गई सब्जियां खाना सेहत के लिए हानिकारक है। स्वास्थ्य विभाग की टीम सब्जी मंडी में गंदी सब्जियों के खिलाफ कार्रवाई करेगी।
डॉ. देवेंद्र चौधरी, सीएमएचओ
जांच करवाकर कार्रवाई की जाएगी
गंदे पानी से जहां सब्जियां उगाई जाती हैंए वहां पहले भी सब्जियां नष्ट करवाई गई थी। अब जांच करवाकर कार्रवाई की जाएगी।
आरके जायसवाल, आयुक्त, नगर निगम
Published on:
12 May 2017 01:45 pm
