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स्वास्थ्य संवारने वालों की बिगड़ रही सेहत

आम लोगों का इलाज करने के साथ स्वास्थ्य का पाठ पढ़ाने वाले चिकित्सक खुद बीमारियों की गिरफ्त में आ रहे हैं।

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जयप्रकाश गहलोत/बीकानेर. आम लोगों का इलाज करने के साथ स्वास्थ्य का पाठ पढ़ाने वाले चिकित्सक खुद बीमारियों की गिरफ्त में आ रहे हैं। चिकित्सकों को शुगर, बीपी, कोलेस्ट्रोल व मोटापा जैसी बीमारियां घेर रही हैं। यह खुलासा एसपी मेडिकल कॉलेज की ओर से पीबीएम के चिकित्सकों पर किए गए शोध में हुआ है। यह शोध इंडियन जनरल ऑफ प्रिवेंटिव मेडिसिन में हाल ही प्रकाशित
हुआ है।

डायबिटिक केयर सेंटर प्रभारी एवं एसपी मेडिकल कॉलेज प्राचार्य डॉ. आरपी अग्रवाल के नेतृत्व में मेडिसिन के प्रोफेसर डॉ. परमेन्द्र सिरोही, डॉ. कैलाश गढ़वाल, डॉ. चित्रेश चाहर ने 310 चिकित्सकों व पैरामेडिकल कर्मचारियों पर मेटाबॉलिक सिन्ड्रोम के असर की जांच के लिए एक साल तक शोध किया। इसमें 180 चिकित्सक और 210 पैरामेडिकल कर्मचारी शामिल किए गए।

शोध के नतीजे चौंकाने वाले आए। शोध में पाया गया कि 50.56 प्रतिशत चिकित्सक और 45.71 प्रतिशत पैरामेडिकल स्टाफ मेटाबॉलिक सिन्ड्रोम की चपेट में है। यह भी स्पष्ट हो गया कि चिकित्सकों पर असर पैरामेडिकल स्टाफ से ज्यादा है।

एसपी मेडिकल कॉलेज प्राचार्य डॉ. आरपी अग्रवाल से बातचीत
क्या चिकित्सक स्वास्थ्य के प्रति लापरवाह हैं?
चिकित्सकों पर किए शोध से तो स्पष्ट होता है कि वे समय के अभाव और तनाव के कारण स्वास्थ्य के प्रति लापरवाह होते जा रहे हैं।

पीबीएम के चिकित्सकों की हालत यह है तो प्रदेश में क्या होगी?
एक साल तक पीबीएम अस्पताल में किए गए शोध में ये चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। अब यह शोध प्रदेशभर में बड़े स्तर पर होना चाहिए। सरकार को इस पर विचार करना चाहिए।

चिकित्सक स्वस्थ-तंदुरुस्त रहें, इसके लिए क्या प्रयास होने चाहिए?
चिकित्सकों में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता लाने के लिए पीबीएम में कार्यक्रम शुरू किए जाएंगे। उन पर काम का दबाव कम तथा कार्यस्थल पर तनावमुक्त माहौल रहे, इसके लिए भी प्रयास किए जाएंगे।

इसलिए हो रहा ऐसा
चिकित्सकों के अनुसार सरकारी सेवा में पहले की अपेक्षा अब अधिक तनाव रहता है। उच्च अधिकारियों के साथ कथित समाजसेवियों का अनुचित दबाव भी तनाव का कारण है। चिकित्सकों की ड्यूटी का समय भी निर्धारित नहीं है। कभी ऑन कॉल बुलाया जाता है तो कभी मनमर्जी से ड्यूटी लगाई जाती है। इससे चिकित्सकों को स्वास्थ्य के लिए समय निकाल पाना संभव नहीं होता।

मेटाबॉलिक सिन्ड्रोम में रिस्क ज्यादा
बीमारियों के समूह को मेटाबॉलिक सिन्ड्रोम कहते हैं। कॉलेस्ट्रोल, शुगर, बीपी, मोटापा यह सभी बीमारियां एक साथ होने पर मेटाबॉलिक सिन्ड्रोम का रूप ले लेती हैं। यह काफी हाई रिस्क होता है। इससे पीडि़त व्यक्ति को लकवे और हार्ट की बीमारी की संभावना बढ़ जाती है।
डॉ. परमेन्द्र सिरोही, प्रोफेसर, मेडिसिन विभाग (पीबीएम अस्पताल)

मेटाबॉलिक होने के ये कारणआए सामने
नौकरी का तनाव
स्वास्थ्य के प्रति उदासीनता
नियमित व्यायाम नहीं करना
नींद पूरी नहीं होना
स्मोकिंग, एल्कोहल का सेवन
शोध में ये बताए
बचाव के उपाय
चिकित्सकों की ड्यूटी का समय निर्धारित हो।
सरकार चिकित्सकों में भी स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता लाए।
नियमित व्यायाम के लिए समय निकालें।
काम का तनाव न रखें।
कार्यस्थल पर खुशनुमा माहौल बनाए रखें।