
आठवीं की छात्रा ने जुगाड़ से बना दी घरेलू ऑटोक्लेव मशीन
हुनर और नवाचारी सोच के बूते कई बार घर में पड़ी कबाड़ की वस्तुओं से भी कमाल हो जाता है। यह साबित कर दिखाया है बीकानेर के राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय जैलवेल की कक्षा 8 की छात्रा तनीषा नायक ने। तनीषा ने जुगाड़ से ही घरेलू ऑटोक्लेव मशीन तैयार कर दी। इस प्रोजेक्ट का इंस्पायर अवार्ड में भी राज्य स्तर पर चयन किया गया है। तनीषा ने बताया कि एक बार पिता चोटिल हो गए थे, तो रोजाना ड्रेसिंग करवानी पड़ती थी। इसके लिए प्रतिदिन अस्पताल जाना महंगा भी पड़ता था। सोचा कि यह घर में क्यों नहीं किया जा सकता..। खुले घाव पर ड्रेसिंग के लिए विसंक्रमित ड्रेसिंग सामान की आवश्यकता पड़ती है। यह ऑटोक्लेव मशीन से ही संभव है। जो घर पर सुलभ नहीं थी। उसने बताया कि शिक्षक दीपक जोशी के मार्गदर्शन में इस तरह की मशीन बनाने के बारे में सोचा और घर में पड़ी वस्तुओं के उपयोग से ही यह घरेलू ऑटोक्लेव मशीन तैयार कर दी। तनीषा ने बताया कि इस प्रोजेक्ट को तैयार करने के लिए काफी अध्ययन और मेहनत की गई। मामूली लागत से तैयार हुई घरेलू ऑटोक्लेव मशीन से कम खर्च में ही ड्रेसिंग मटेरियल, अस्पताल में काम आने वाले आवश्यक उपकरण आदि को विसंक्रमित यानी कीटाणुरहित किया जा सकता है।
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वर्तमान युग इनोवेशन का है। विद्यार्थियों में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। बस उन्हें तराशने की आवश्यकता है। उनमें वैज्ञानिक दृष्टिकोण उत्पन्न करना प्रथम सोपान है। हर विद्यालय में विज्ञान शिक्षक के मार्गदर्शन में सामुदायिक हित में विज्ञान शिक्षण के तहत विद्यार्थियों से ऐसे वर्किंग मॉडल तैयार करवाने चाहिए। मॉडल नवीन सोच पर आधारित होने चाहिए। साथ ही समुदाय के लिए लाभकारी भी हों। इस तरह से प्रोजेक्ट मॉडल निर्माण प्रक्रिया को माध्यमिक कक्षाओं के विद्यार्थियों के पाठ्यक्रम में योजनाबद्ध तरीके से समावेशित किया जाना चाहिए। इससे विद्यार्थियों में दिलचस्पी भी जगेगी।
दीपक जोशी, नेशनल अवार्डी शिक्षक 2021
Published on:
01 Mar 2024 06:58 pm
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