
पेयजल संकट से निपटने के लिए सरकार को भेजेंगे सुझाव
बीकानेर. अगले साल पहली तिमाही में प्रस्तावित 70 दिन की नहरबंदी को लेकर जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग और जल संसाधन विभाग के अधिकारियों ने सोमवार को बीकानेर में मंथन किया। अभी तक सालाना करीब एक महीने की बंदी ली जाती रही है। इसमें भी पेयजल संकट के हालात पैदा हो जाते है। एेसे में अगले साल बंदी के दौरान पैदा होने वाले हालातों से निपटने के लिए अभी से विभागों ने तैयारी शुरू की है।
इंदिरा गांधी नहर परियोजना व जलदाय विभाग केअधिकारियों ने मंथन करने के बाद सोमवार को विस्तृत सुझाव तैयार करने की कार्रवाई शुरू की है। जिसे राज्य सरकार और मुख्यालय को भेजे जाएंगे। जलदाय विभाग शहरी व ग्रामीण क्षेत्र की पेयजल योजनाओं के आधार पर बंदी को लेकर अपना पक्ष रखेगा। फिलहाल नहरबंदी की तिथि घोषित नहीं हुई है लेकिन मार्च में ७० दिनों की नहरबंदी शुरू हो सकती है। पंजाब की ओर से इंदिरा गांधी मुख्य नहर में लाइलिंग का कार्य कराया जाना है। राजस्थान के हिस्से में भी नहर की रीलाइनिंग और मरम्मत के कार्य होने है। इसके लिए सरकार ने ३२९१ करोड़ का बजट स्वीकृत किया गया है।
बीकानेर जल संसाधन विभाग मुख्य अभियंता कार्यालय में आयोजित बैठक में मुख्य अभियंता विनोद चौधरी, मुख्य अभियंता (उत्तर) विनोद मित्तल, जलदाय विभाग के अतिरिक्त मुख्य अभियंता अशोक गौड़, अधीक्षण अभियंता दीपक बंसल के साथ ही जोधपुर व अन्य जिलों के अधिकारियों ने भी सुझाव रखे।
2650 क्यूसक पानी से जुगाड़
लाइलिंग का कार्य होने के कारण यूं तो ७० दिन की नहरबंदी रहेगी, मगर राजस्थान में मरम्मत का कार्य ३० दिनों तक चलेगा, इस कारण एक माह के लिए नहर पूरी तरह से बंद रहेगी। इस अवधि के बाद डायवर्सन से २६५० क्यूसक पानी छोड़ा जाएगा। सीमित मात्रा में मिलने वाले इस पानी से ही काम चलाना होगा। इस पानी से प्रदेश के श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, बीाकनेर, जोधपुर, बाड़मेर सहित १० जिलों में पेयजल आपूर्ति की जानी है।
भंडारण पर्याप्त नहीं
बैठक में अधिकारियों ने कहा कि जैसलमेर में हालात ज्यादा खराब है। वहां पर जलदाय विभाग के पास एक सप्ताह तक पानी का भंडारण किए जाने की ही व्यवस्था है। डिग्गियों में २५ से ३० दिनों तक पानी का भंडारण किया जा सकता है, लेकिन उनको भरने की व्यवस्था अभी विभाग के पास नहीं है।
Published on:
08 Oct 2019 08:22 am
