
जाना है मुझको यारों, आगे उन आसमानों से... और सितारा चला गया
बीकानेर. 'जाना है मुझको. जाना है यारों, आगे उन आसमानों से, वाकिफ नहीं है यहां कोई मेरी अजनबी उड़ानों से....Ó हर किसी की जुबान पर चढ़े इस गाने को आवाज देने वाले संदीप आचार्य बीकानेर के रहने वाले थे। संदीप आचार्य वर्ष २००४ में राजस्थान पत्रिका के गोल्डन वॉयस से सुरों के सरताज बने। उनका आज जन्म दिन है। महज २९ साल की उम्र में संदीप ने गायकी के क्षेत्र में शोहरत की उन बुलंदियों को छू लिया था, जहां पहुंचने में गायकों को सालों लग जाते है।
पत्रिका की खौज संदीप आचार्य बीकानेर के रहने वाले थे। छोटे पर्दे पर सिंगिंग रियलटी शो 'इंडियन आइडियल-२Ó का खिताब भी संदीप के नाम है। सुरीली आवाज के धनी संदीप आचार्य ने बहुत छोटी उम्र में कई खिताब जीत लिए। गायकी की बदौलत वॉलीवुड में एन्ट्री की। महज २२ साल की उम्र में इंडियन आइडियल के विनर बने। इससे पहले २० साल की उम्र में राजस्थान के बेस्ट सिंगर के रूप में उभरे। उन्होंने अमेरिका के न्यू जर्सी में बेस्ट न्यू बॉलीवुड टेलेंट का अवार्ड भी प्राप्त किया।
बीमारी ने छीन लिया सितारा
संदीप आचार्य का जन्म ४ फरवरी १९८४ में जन्म हुआ था। वे चार बहन-भाइयों में सबसे छोटे थे। उनकी पत्नी नम्रता आचार्य है। जिसने संदीप की मौत से ठीक २० दिन पहले बेटी को जन्म दिया था। संदीप को २९ की उम्र में पीलिया हो गया। गुडग़ांव के मंदांता में उपचार के लिए भर्ती कराया गया। जहां १५ दिसम्बर २०१३ को संदीप का निधन हो गया।
बीकानेर के आंखों के तारे
संदीप आचार्य ने बहुत छोटी उम्र में आवाज की बदौलत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान कायम की। वे बीकानेर पुराने शहर के लोगों के आंखों के तारे है। संदीप के सहपाठी बताते है कि २००४ से २०१३ के बीच बीकानेर का हर व्यक्ति सीना चौड़ा कर संदीप का नाम लेता था। वह हर किसी के चहते थे और उम्र में छोटे होने के चलते बड़े-बुजुर्गों से आशीर्वाद लेते थे।
Published on:
04 Feb 2019 03:12 pm
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