
पंजाब में काम पूरा हो तभी मिलेगा राजस्थान को पूरा पानी
मंगेश कौशिक
श्रीगंगानगर. राज्य सरकार जल जीवन मिशन में इंदिरा गांधी नहर का चार हजार क्यूसेक से अधिक पानी पेयजल के लिए आरक्षित करती है तो उसे पंजाब में इस नहर के 60 किलोमीटर (179 आरडी) लंबे हिस्से का पुनर्निर्माण प्राथमिकता से करवाना होगा। ऐसा नहीं हुआ तो राजस्थान जल क्षेत्र पुनर्गठन परियोजना के तहत राजस्थान में 3300 करोड़ की लागत से होने वाले पुनर्निर्माण कार्यों का कोई लाभ नहीं मिलेगा।
पेयजल के लिए पानी आरक्षित करने पर किसानों को ङ्क्षसचाई के लिए मिलने वाले पानी में कटौती होगी, जिससे इंदिरा गांधी नहर से ङ्क्षसचित प्रदेश के चार जिलों हनुमानगढ़, श्रीगंगानगर, बीकानेर और जैसलमेर में पानी की कमी से कृषि उत्पादन में भारी गिरावट आ सकती है। ङ्क्षसचाई पानी की कमी को लेकर इन जिलों में किसान आंदोलन शुरू हो गए तो कानून व्यवस्था की स्थिति बिगड़ सकती है।
पंजाब- हरियाणा में इंदिरा गांधी नहर फीडर की लंबाई 170 किलोमीटर है। इसमें नहर के उद्गम हरिके हैडवक्र्स से 179 आरडी तक 60 किलोमीटर के हिस्से में अभी तक पुनर्निर्माण का कोई काम नहीं हुआ है। नहर का यह हिस्सा सबसे ज्यादा क्षतिग्रस्त है और इसी कारण पंजाब 18000 क्यूसेक से अधिक क्षमता वाली इस नहर में 11000 क्यूसेक से अधिक पानी नहीं छोड़ता। इसकी मुख्य वजह यही है कि ज्यादा पानी छोडऩे पर नहर कहीं पर भी टूट कर पंजाब में भारी तबाही मचा सकती है। नहर के क्षतिग्रस्त होने का खमियाजा राजस्थान को एक दशक से भी अधिक समय से भुगतना पड़ रहा है।
परियोजना 2025 में पूरी
राजस्थान जल क्षेत्र पुनर्गठन परियोजना के अंतर्गत इंदिरा गांधी मुख्य नहर, इसकी शाखाओं, वितरिकाओं और छोटी नहरों के पुनर्निर्माण का काम 2025 तक पूरा हो जाएगा। इससे नहर के राजस्थान वाले हिस्से में तो पानी की क्षति कम हो जाएगी। लेकिन 4000 क्यूसेक पानी जल जीवन मिशन के अंतर्गत पेयजल के लिए आरक्षित किए जाने से क्षति कम होने से पानी की जो बचत होगी, उसका फायदा नहीं मिलेगा। फायदा तभी होगा जब राज्य सरकार पंजाब में हरिके हैडवक्र्स से 179 आरडी तक नहर के सबसे ज्यादा क्षतिग्रस्त हिस्से का पुनर्निर्माण करवाएगी।
प्रदेश को यह होगा फायदा
इंदिरा गांधी नहर में राजस्थान का हिस्सा 8.6 एमएएफ है। लेकिन नहर के क्षतिग्रस्त होने के कारण वर्तमान में राजस्थान को 5.4 एमएएफ पानी ही मिल रहा है। नहर का पानी पहले चार जिलों हनुमानगढ़, श्रीगंगानगर, बीकानेर और जैसलमेर में ङ्क्षसचाई के साथ पेयजल की जरूरत को पूरा कर रहा था। लेकिन अब इसका पानी बाड़मेर, जोधपुर, नागौर, चूरू, सीकर और झुंझुनूं जिलों की भी प्यास बुझा रहा है। राजस्थान के साथ पंजाब में नहर के पुनर्निर्माण का काम पूरा हो जाएगा तो पंजाब से हिस्से का पूरा पानी मिलने लगेगा और पेयजल के लिए आरक्षित पानी का असर ङ्क्षसचाई के पानी में होने वाली कटौती पर उतना नहीं पड़ेगा, जितनी की आशंका व्यक्त की जा रही है। नहरी पानी के साथ ट््यूबवैल के पानी का उपयोग कर किसान 1500 करोड़ रुपए का अधिक उत्पादन कर सकेंगे।
डीपीआर के लिए लिखा
इंदिरा गांधी नहर के पुनर्निर्माण का प्रोजेक्ट तैयार हुआ था तब 0 से 179 आरडी तक के हिस्से को शामिल नहीं किया गया था। अब सरकार ने इस हिस्से के पुनर्निर्माण के लिए पंजाब सरकार को डीपीआर (डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट) तैयार करने के लिए लिखा है। डीपीआर तैयार होने पर यह काम भी हो जाएगा।
अमरजीत मेहरड़ा, मुख्य अभियंता, जल संसाधन उत्तर क्षेत्र, हनुमानगढ़
Published on:
29 Mar 2023 01:25 am
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