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बारिश-उमस के दिन हैं, सांस लेने में तकलीफ है, तो सावधान…

संभाग के सबसे बड़े पीबीएम अस्पताल के टीबी एवं श्वसन रोग विभाग में उमस से पीडि़त अस्थमा रोगियों की संख्या गत एक सप्ताह में तेजी से बढ़ी है। अधिक उमस होने पर लोगों में सांस लेने में तकलीफ की बात सामने आ रही है।

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बारिश-उमस के दिन हैं, सांस लेने में तकलीफ है, तो सावधान...

बारिश-उमस के दिन हैं, सांस लेने में तकलीफ है, तो सावधान...

बीकानेर. इस समय जगह-जगह बरसात होने के बावजूद उमस पीछा नहीं छोड़ रही है। सुबह से रात तक उमस से लोगों का हाल-बेहाल हो रहा है। शरीर पसीने से तरबतर हो जाता है। स्थिति यह हाे रही है कि कूलर चलने से उमस और अधिक बढ़ने लगती है। इसका असर लोगों के स्वास्थ्य पर भी नजर आने लगा है। इलाज के लिए लोगों का अस्पताल पहुंचने का सिलसिला भी शुरू हो गया है। संभाग के सबसे बड़े पीबीएम अस्पताल के टीबी एवं श्वसन रोग विभाग में उमस से पीडि़त अस्थमा रोगियों की संख्या गत एक सप्ताह में तेजी से बढ़ी है। अधिक उमस होने पर लोगों में सांस लेने में तकलीफ की बात सामने आ रही है।

चार सौ रोगियों का पंजीकरण, औसतन तीस मरीज होते हैं नए

उमस का समय शुरू होने के बाद श्वसन रोग विभाग में लगभग पचास फीसदी तक रोगियों की संख्या बढ़ गई है। सुबह आउटडोर खुलने के दौरान ही रोगियों की कतार लगने लगती है। इस समय प्रतिदिन करीब चार सौ मरीजों का पंजीकरण किया जा रहा है। इसमें से तीस मरीज नए शामिल होते हैं। चिकित्सकों का मानना है कि अगर उमस कम नहीं हुई, तो अस्थमा रोगियों की संख्या में और इजाफा हो सकता है।पहले औसतन दो सौ का ही था आउटडोर

उमस से पहले हालांकि मरीज सांस की तकलीफ की शिकायत लेकर अस्पताल आते थे, लेकिन आउटडोर में उनका पंजीकरण दो सौ के करीब होता था। अब अचानक मरीज बढ़ने से चिकित्सक भी चिंतित हैं। चिकित्सकों का कहना है कि विभाग में आने वाला हर चौथा व्यक्ति अस्थमा पीडि़त दिख रहा है। इसमें वृद्धजनों की संख्या अधिक है।

कुछ मरीजों को आती है भर्ती करने की नौबत

आउटडोर में आने वाले मरीजों में से करीब 20 रोगियों को भर्ती करने की नौबत आती है। उनको सांस में तकलीफ होने के साथ-साथ जुकाम तथा एलर्जी की शिकायत भी रहती है।

चिकित्सकीय सलाह आवश्यक

उमस के दौरान अगर किसी को सांस की तकलीफ अधिक होती है, तो उसे तुरन्त चिकित्सीय सलाह लेनी चाहिए। साथ ही दवा लेने में लापरवाही नहीं बरतें और अगर आवश्यक हो तो दवा की मात्रा भी बढ़ाएं। इन दिनों विभाग में आने वाला हर चौथा व्यक्ति अस्थमा पीडि़त रह रहा है। - डॉ. गुंजन साेनी, विभागाध्यक्ष क्षय एवं श्वसन रोग विभाग


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