मेले में पंजाब, हरियाणा व जैसलमेर, बाड़मेर सहित आसपास के क्षेत्र से श्रद्धालु पहुंचे । धधकते अंगारो पर थिरके अनुयायी। मेले में शुक्रवार रात्रि को अग्नि नृत्य हुआ। इसमें धधकते अंगारो पर अनुयायी आस्था के साथ थिरके। इस अवसर पर जसनाथजी द्वारा रचित सिंम्भूधड़ो, कोड़ो, गोरखछन्दों, स्तवन रचनाओं का गायन किया सिद्धों में नमो: आदेश बोल अभिवादन की परम्परा है। जारगण के बाद इस पंथ के मतावलंब तीर्थ स्थान से चलू आचमन लेकर विदाई ली।