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तेमड़े नामक राक्षस को मारा, तो तेमड़ा राय के नाम से जगत में हुई विख्यात

अश्विन शुक्ला सप्तमी को भगवती के मन्दिर से मां करणी की शोभायात्रा तेमड़ा राय मन्दिर जा

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तेमड़े नामक राक्षस को मारा, तो तेमड़ा राय के नाम से जगत में हुई विख्यात

तेमड़े नामक राक्षस को मारा, तो तेमड़ा राय के नाम से जगत में हुई विख्यात

नंदकिशोर शर्मा
तेमड़ा राय मन्दिर देशनोकआज करणी माता का जन्मदिवस है। अश्विन शुक्ला सप्तमी को भगवती के मन्दिर से मां करणी की शोभायात्रा तेमड़ा राय मन्दिर जाती है। इसमें देश के विभिन्न हिस्सों से बड़ी संख्या में भक्त मां का नाम लेते साथ शोभा यात्रा में चलते हैं। करीब 600 वर्षों से इस परम्परा को उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। कहते हैं माताजी स्वयं अपने जन्मदिन के दिन अपनी आराध्य देवी आवड़जी के यहां धोक लगाने गईं।

यों तो मां के सभी स्थान अपने आप में अद्भुत है, लेकिन जिस स्थान की चर्चा की जा रही है। उस देवी की महिमा आदिकाल से है। सभी शक्ति उपासकों की आराध्य देवी रूप में मां के स्वरूप भी अलग-अलग हैं। कोई नवदुर्गा के रूप में पूजता है, तो कोई लक्ष्मी व सरस्वती के रूप में पूजन करता है।अखंड भारत के 52 शक्तिपीठ चेतना के केंद्र रहे हैं।

इनमें से एक शक्तिपीठ हिंगलाज जो वर्तमान में पाकिस्तान के बलूचिस्तान में स्थित है। उन्हीं का अवतार आवड़जी के रूप में हुआ। इन्होंने तेमड़े नामक राक्षस को मारा, जिससे तेमड़ा राय के नाम से जगत में विख्यात हुई और भाटी वंश की कुलदेवी के रूप में पूजी जाती है। इनका मुख्य स्थान जैसलमेर जिले में भोपा गांव के पास है। उसी देवी की पूजा करणीजी करते थे और उनकी आराध्य देवी है। करणीजी के साठिका से प्रस्थान में गोधन के साथ आवड़जी की पूजा का बड़ा महत्व है, जिनको वह एक पेटी में रखते थे, जिसे करण्ड (पेटिका) के नाम से जाना जाता है। रास्ते में राव कान्हा ने करणीजी को अपने राज्य से जाने का कहा, तो उन्होंने कहा कि मैं चली जाऊंगी, तू मेरी यह पेटी उठाकर मेरे रथ में रख दे। अपने मद में चूर राव कान्हा ने अपने सेवकों को कहा कि इस पेटी और इस जादूगरनी को उठाकर बाहर कर दो, लेकिन कहते हैं कि राव कान्हा की सेना के बड़े से बड़े पहलवान उस पेटी को हिला नहीं सके।

अंत में हाथी से जब उसको खिंचवाया गया, तो उस पेटी का एक पैर टूट गया। तब करणीजी ने कहा, कान्हा ये तेरे जीवन का हिस्सा टूटा है। उसी पेटिका को माताजी ने देशनोक में स्थायी निवास के बाद तेमड़ा राय मन्दिर में स्थापित किया, जो देशनोक कस्बे के बीच में स्थित है।