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राजा-महाराजा का मनोरंजन करने वाली कला के कद्रदान घटे

दूदावास गांव में वर्ष में कई बार बहुरूपिया आकर लोगों को खेल दिखाकर जीवन यापन करते है लेकिन अब इस कला के कद्रदान घटने से रोजी-रोटी का संकट मंडराने लगा है।

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Nikhil Swami

Jun 23, 2016

king emperor

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दूदावास गांव में वर्ष में कई बार बहुरूपिया आकर लोगों को खेल दिखाकर जीवन यापन करते है लेकिन अब इस कला के कद्रदान घटने से रोजी-रोटी का संकट मंडराने लगा है।

दूदावास में आए पप्पू बहुरूपिया ने बताया कि उनके पूर्वज भी इस कला दिखाने का ही काम करते थे तथा उस समय इस प्रकार के खेलों की कद्र थी तथा राजा महाराजा इन खेलों को करवा कर मनोरंजन करते थे लेकिन अब इस कला की कद्र घट गई।

अब गांवों की गली-गली व घर-घर घूमकर पेटपालन का काम करना पड़ता है। दिनभर लोगों को खेल दिखाने के बाद भी रोजी-रोटी का जुगाड़ करना मुश्किल हो रहा है।

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