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नब्बे साल पहले बन गया था मिलावट रोकने का कानून, दोषियों को कड़ी सजा और जुर्माने का था प्रावधान

वर्तमान में भले ही मिलावट रोकने के लिए कानून बन गए हो लेकिन उनकी सख्ताई से पालना नहीं करवाने से ये अधिक प्रभावी साबित नहीं हो रहे है लेकिन बीकानेर रियासत में नब्बे साल पहले मिलावट रोकने के लिए ना केवल कानून बनाया गया बल्कि उसका सख्ताई से पालन भी करवाया गया।
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Law of adulteration

Law of adulteration

विमल छंगाणी/बीकानेर. वर्तमान में भले ही मिलावट रोकने के लिए कानून बन गए हो लेकिन उनकी सख्ताई से पालना नहीं करवाने से ये अधिक प्रभावी साबित नहीं हो रहे है लेकिन बीकानेर रियासत में नब्बे साल पहले मिलावट रोकने के लिए ना केवल कानून बनाया गया बल्कि उसका सख्ताई से पालन भी करवाया गया।

उस कानून के तहत ना केवल बीकानेर रियासत में खाद्य पदार्थों में मिलावट की निरन्तर जांच होती थी बल्कि मिलावट का दोषी पाए जाने पर कड़ी सजा और जुर्माने का प्रावधान था। दुकानदारों के लाइसेंस भी निरस्त किए जाते थे। बीकानेर रियासत ने नब्बे साल पहले ही खाद्य पदार्थों और दवाओं में हो रही मिलावट तथा आमजन के स्वास्थ्य पर पड़ रहे विपरीत असर को भांपते हुए वर्ष १९२८ में खाद्य पदार्थों और दवाओं में मिलावट रोकने के लिए कानून बनाया था।

इस एक्ट में खाद्य पदार्थों की जांच, नमूने लेने सहित मिलावट मिलने पर जुर्माना और सजा का प्रावधान रखा गया था। विश्लेषक कानून की पालना को लेकर शिकायत मिलते ही कार्रवाई करने पहुंच जाते थे। खाद्य पदार्थ ही नहीं दवाओं में मिलावट को लेकर भी बीकानेर रियासत में सख्ती थी। राजस्थान राज्य अभिलेखागार विभाग में बीकानेर रियासत में बने इस कानून से संबंधित अभिलेख सुरक्षित है।

लेते थे तीन नमूने
बीकानेर रियासत में करीब नब्बे साल पहले मिलावट (आमेजिश) को रोकने का एक्ट बना था। इस एक्ट में शामिल कई दफाएं (धाराओं) के माध्यम से मिलावट रोकने, मिलावट मिलने, जांच प्रक्रिया, जुर्माना, सजा आदि की व्याख्या की गई थी। एक्ट के अनुसार उस दौर में मिलावटी आशंका पाए जाने पर खाद्य पदार्थ के तीन नमूने लेने की व्यवस्था थी। तीनों नमूनों पर मौके पर ही सरकारी विश्लेषक राज्य की मोहर लगाते थे। मोहर लगा एक नमूना उस दुकानदार को, एक शिकायतकर्ता को और तीसरा नमूना राज्य के पास रहता था जिसकी जांच होती थी।

शुद्धता और स्वास्थ्य था सर्वोपरि
मिलावट रोकने के लिए बनाए गए एक्ट में खाद्य पदार्थों और दवाओं की शुद्धता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई थी। एक्ट में आमजन के स्वास्थ्य के मद्देनजर कई प्रावधान रखे गए थे। कोई भी खाद्य पदार्थ बनाने वाला व्यक्ति और दुकानदार के लिए मिलावट रोकने को लेकर बनाए गए एक्ट की सख्ती से पालना करनी आवश्यक थी। एेसा नहीं पाए जाने पर खाद्य पदार्थों की जांच, नमूने लेने, मिलावट पाए जाने पर एक्ट में वर्णित धाराओं के अनुसार जुर्माने और सजा की व्यवस्था थी।

प्रभावी था यह कानून
बीकानेर रियासत में खाद्य पदार्थों में मिलावट की लगातार जांच होती थी। दोषी पाए जाने पर कड़ी सजा और जुर्माने का प्रावधान था। कई मामलों में दुकानदारों के लाइसेंस भी निरस्त कर दिया जाता था। बीकानेर रियासत में मिलावट को रोकने का कानून १९२८ में बना था। इसका सख्ताई से पालन होता था। रियासतकाल में यह कानून अधिक प्रभावी था।
महेन्द्र खडग़ावत, निदेशक, राजस्थान राज्य अभिलेखागार विभाग बीकानेर।

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