
भारत-पाक के बीच 1971 के युद्ध में सेना की पूर्वी कमान के लेफ्टिनेंट जनरल रहे चिमन सिंह शेखावत का रविवार को 92 साल की आयु में निधन हो गया। देर शाम उनकी पार्थिव देह की सैनिक सम्मान के साथ अंत्येष्टी की गई। इस मौके पर सेना के दस्ते ने सलामी दी। पवनपुरी स्थित राजपूत समाज मुक्ति धाम में अंतिम संस्कार के समय सेना, बीएसएफ जवान और जिला प्रशासन के अधिकारी व जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।

परम विशिष्ट सेवा मेडल से सम्मानित जनरल चिमन सिंह शेखावत मूलत: बीकानेर जिले की नोखा तहसील के धुपालिया गांव के रहने वाले थे। उन्होंने सादुलगंज स्थित निवास पर अंतिम सांस ली। उनके जेष्ठ पुत्र दिग्विजय सिंह धुपालिया ने अंतिम संस्कार की रस्म अदा की। सेना की रणबांकुरा डिवीजन के सैनिकों ने तीन राउंड फायर कर सलामी दी।

सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल को अंतिम विदाई देने मेजर जनरल धनोवा (जरनल ऑफिसर कमांडिंग इन चीफ), सेवानिवृत्त बिग्रेडियर जगमाल सिंह, सेवानिवृत्त कर्नल मोहन सिंह धुपालिया, कर्नल हेम सिंह शेखावत, स्क्वाड्रन लीडर एलएन वर्मा, सैनिक कल्याण बोर्ड के अधिकारी बीके मजूमदार, भाजपा शहर जिलाध्यक्ष डॉ. सत्यप्रकाश आचार्य, महापौर नारायण चौपड़ा, यूआईटी चेयरमैन महावीर रांका, भाजपा नेता बिहारी लाल बिश्नोई, सुरेन्द्र सिंह शेखावत, अखिलेश प्रताप सिंह, किसान मोर्चा के नवरतन सिंह सिसोदिया, अशोक भाटी, अशोक बोबरवाल, कांग्रेस प्रदेश कमेटी पदाधिकारी जिया उर रहमान आरिफ आदि पहुंचे।

चार में से एक कमान के लीडर-: लेफ्टिनेंट जनरल चिमन सिंह शेखावत ने 1971 के भारत-पाक युद्ध में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उस समय सेना के चार जनरल हुआ करते थे। इनमें से पूर्वी कमान के लीडर चिमन सिंह थे। वे साल 1984 में सेवानिवृत्त हुए। उन्हें साहसिक कारनामों पर परम विशिष्ट सेवा मेडल से सम्मानित किया गया।