18 जनवरी 2026,

रविवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

बिगड़े उत्पादन के हाजमे को सुधार रही ईसबगोल के भाव की खुराक

- लाइफ टाइम हाई: ईसबगोल के भाव 28 हजार रुपए प्रति क्विंटल के पार - प्रदेश की सबसे बड़ी आवक मंडी बनी नोखा, मल्टीग्रेन में उपयोग से भी बढ़ी मांग - देश में 80 प्रतिशत से ज्यादा उत्पादन करता है अकेला राजस्थान

3 min read
Google source verification
बिगड़े उत्पादन के हाजमे को सुधार रही ईसबगोल के भाव की खुराक

बिगड़े उत्पादन के हाजमे को सुधार रही ईसबगोल के भाव की खुराक

दिनेश कुमार स्वामी

रात-बिरात घर में किसी का हाजमा यानी पेट की पाचन प्रक्रिया बिगड़ जाए, तो ईसबगोल की खुराक रामबाण औषधि का काम करती है। इस बार पाला, बारिश और ओलावृष्टि ने जब किसान के ईसबगोल उत्पादन की सेहत को बिगाड़ दिया, तब किसानों की पेशानी पर बल पड़े। ईसबगोल के अनुमानित उत्पादन में बड़ी गिरावट की किसानों पर मार पड़ी। अब फसल मंडी में आते ही किसानों के माथे की शिकन मिटने लगी है। दरअसल, उनके नुकसान की भरपाई ईसबगोल के मिल रहे भाव कर रहे हैं। ईसबगोल के भाव लाइफ टाइम हाई पर चल रहे हैं।भाव 28 हजार प्रति क्विंटल पार

प्रदेश की सबसे बड़ी ईसबगोल आवक मंडी नोखा में रोजाना 15 हजार बोरी की आवक हो रही है। इसके भाव 28 हजार रुपए प्रति क्विंटल को पार कर चुके हैं। देश के कुल ईसबगोल उत्पादन का 80 से 85 फीसदी उत्पादन राजस्थान में होता है। इसी के साथ बीते दो साल में नए स्टार्टअप में ईसबगोल के नए-नए उपयोग भी सामने आए है। इसका असर यह रहा कि पिछले साल मंडी में किसान को 16 से 17 हजार रुपए प्रति क्विंटल के भाव मिल रहे थे। वह इस बार लगभग दो गुणा होने की ओर बढ़ रहे हैं।

मौसम की मार पर मरहम

ईसबगोल के बम्पर भाव किसानों पर पड़ी मौसम की मार पर मरहम का काम कर रहे हैं। इसी के साथ भाव बढ़ने का एक कारण एनसीडीईएक्स में ईसबगोल को शामिल करने की तैयारी भी बताया जा रहा है। नेशनल कमोडिटी एक्सचेंज की ओर से 19 अप्रेल से ईसबगोल को खोलने की तैयारी है।

जानिए ईसबगोल के उत्पादन व खपत का गणित

देश में उत्पादन

2730 लाख बैग (75 किलो प्रति बैग्) देश में पिछले साल ईसबगोल का कुल उत्पादन-32 से 33 लाख बैग उत्पादन होने का था अनुमान

10 फीसदी ज्यादा बुवाई होने होने से बढ़े उत्पादन की थी उम्मीद20-22 लाख बैग उत्पादन होने का अनुमान। कारण बेमौसम बारिश, ओलावृष्टि और पाला।

निर्यात व घरेलू खपत- देश में घरेलू और निर्यात की कुल खपत मांग- 27 से 28 लाख बैग।

- ईसबगोल से 25 प्रतिशत हिस्सा भूसी व 75 प्रतिशत गोला व लाली है।- भूसी मल्टीग्रेन आटा, पेट की दवाइयां और खाद्य में काम आती है।

- गोला व लाली का उपयोग पशुआहार बनने में किया जाता है।

वैश्विक परिदृश्य

- 2800 कंटेनर भूसी का निर्यात विश्व के देशों को करता है भारत।

- 30 प्रतिशत भूसी का निर्यात यूरोप, 40 फीसदी अमेरिका में।- 30 फीसदी बांग्लादेश, पाकिस्तान समेत पड़ोसी देश में व घरेलू खपत।

इस साल उत्पादन अनुमान

- राजस्थान में 17 से 18 लाख बैग ईसबगोल का उत्पादन रहने का अनुमान है।- गुजरात में 4 से 5 लाख बैग उत्पादन का अनुमान है।

नए उपयोग: इसने बढ़ाई उपयोगिता व मांग

- ईसबगोल को मल्टीग्रेन आटे में मिलाया जाने लगा है।

- यूएस में पेट की बीमारियों की दवाइयां में उपयोग।- यूरोप में सामान्य भोजन में फाइबर की पूर्ति के लिए उपयोग।

- मैदे के ज्यादा चलन वाले देशों में इसे मैदा में मिक्स करने लगे।

ईसबगोल की प्रमुख मंडिया

- राजस्थान: नोखा, भीनमाल, जोधपुर, फलोदी, नागौर, मेड़ता, बाड़मेर, जैसलमेर, धोरीमन्ना, गूढामालानी।

- गुजरात: उंझा, थराद, नेनावा, धानेरा और सोराष्ट्र का एरिया।

एक्सपर्ट व्यू----प्रदेश में प्रोसेसिंग और उत्पादन को मिलेगा बढ़ावा

पुखराज चोपड़ा, विश्लेषक कृषि विपणन एवं वायदा कारोबार

ईसबगोल का उत्पादन इस बार उत्पादन से काफी कम रहने का अनुमान है। इसकी वजह मौसम खराब रहना प्रमुख है। बारिश, ओलावृष्टि और पाला पड़ने से फसल खराब हुई। ईसबगोल के भाव जहां पिछले साल 16 हजार को पार नहीं कर पाए। वह इस बार 29 हजार पर पहुंच चुके है। अभी किसान खेत से फसल मंडी में ला रहे है, ऐसे में भाव बढ़ने का सीधा फायदा किसान को मिला है। अभी भूसा बनाने और पशुआहार की 90 फीसदी फैक्ट्रियां गुजरात में हैं, जबकि उत्पादन महज वहां 15 से 20 फीसदी ही है। अब भाव अच्छे मिलने से जहां इसका बुवाई क्षेत्र बढ़ेगा, वहीं ईसबगोल को प्रोसेस करने के प्लांट भी राजस्थान में लगेंगे। इससे प्रदेश को सीधा फायदा होगा। ईसबगोल उपयोग के नए-नए क्षेत्र खुल रहे हैं। इससे प्रदेश में नए स्टार्टअप को बढ़ावा मिलेगा। सबसे बड़ी बात 19 अप्रेल से एनसीडीईएक्स में इसे शामिल किया जा रहा है। इससे भी भावों में तेजी आ रही है।