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सूंई सहकारी समिति में ऋण घोटाले का आरोप

किसानों ने किया प्रदर्शन, जिला कलक्टर को सौंपा मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन

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Loans scam accused in Soani Cooperative Committee

Loans scam accused in Soani Cooperative Committee

बीकानेर. महाजन. लूणकरनसर तहसील की सूंई ग्राम सेवा सहकारी समिति में अल्पकालीन ऋण, कृषि ऋण एवं स्वयं सहायता समूह ऋणों में ऋणमाफी के तहत गड़बड़ी करने का मामला सामने आया है। ग्रामीणों ने जिला कलक्टर कार्यालय पर सोमवार को प्रदर्शन कर समिति अध्यक्ष व व्यवस्थापक पर घोटाले का आरोप लगाते हुए जांच की मांग की। कलक्टर ने इस पर उन्हें कार्रवाई का भरोसा दिलाया है।

सूंई के सामाजिक कार्यकर्ता मनीराम टाण्डी के नेतृत्व में समिति के उपाध्यक्ष बीरबलराम मेघवाल, कृषि मण्डी निदेशक मनीराम मेेघवाल सहित बड़ी संख्या में किसानों ने कलक्टर के समक्ष आरोप लगाए कि समिति अध्यक्ष व व्यवस्थापक ने मिलीभगत कर ऋण के नाम पर लाखों का गबन किया है।

किसानों ने कहा कि समिति अध्यक्ष ने खुद के नाम से ऋणमाफी का लाभ उठाया है। इसी प्रकार व्यवस्थापक ने भामाशाह में बनो नाम से महिला का नाम दर्ज कर अपनी पुत्री बताते हुए ऋणमाफी का लाभ लिया, जबकि इस नाम से व्यवस्थापक के कोई पुत्री नहीं है। दोनों की उम्र में भी महज ३ साल का अंतर है, जो फर्जीवाड़े का खुलासा करता है।

चहेतों को दिलवाया लाभ
किसानों ने बताया कि फर्जी दस्तावेजों से गांव के गरीब किसानों व दलित वर्ग के लोगों के नाम से ऋण दर्शाकर घोटाला किया गया है। कर्जमाफी का करीब ९० प्र्रतिशत लाभ चहेतों लोगों को दिलवाया गया है। किसानों ने कलक्टर को बताया कि व्यवस्थापक के खिलाफ नोटबंदी के दौरान फर्जीवाड़े का मुकदमा भी दर्ज हुआ था। किसानों के सूंई ग्राम सेवा सहकारी व क्रय-विक्रय सहकारी समिति लूणकरनसर का रिकॉर्ड सीज कर जांच कराने की मांग की।

इनमें भी फर्जीवाड़े की आशंका

बनो पुत्री रमेश कुमार, जीवनराम पुत्र मालाराम, कान ङ्क्षसह पुत्र रामचन्द्र सिंह, कुसुम पुत्री राजेन्द्र ङ्क्षसह, लालचंद पुत्र पेमाराम, रावत सिंह पुत्र भूर सिंह, प्रेम सिंह पुत्र सुमेर सिंह सहित बाली देवी, मोहरा, सोना, शेरा, भंवरी, इन्द्रा, गिरदावरी, उच्छम, सजना, धापी, रामेश्वरी, फुसी, कमल, सुमन, उम्मेद, सज्जन, मोहनी, संतोष, सरस्वती, परमेश्वरी, मनोहरी, नीलम, रतन, मणि, बाली, कृष्णा के नाम भी फर्जीवाड़े से ऋण माफी करवाने के आरोप हैं।

वहीं वास्तविक व्यक्ति का ऋण माफी से कोई वास्ता नहीं है। कलक्टर ने इस मामले में अतिरिक्त जिला कलक्टर शैलेन्द्र देवड़ा को जांच का जिम्मा सौंपा है। बताया जाता है कि फर्जीवाड़े की भनक लगने के बाद बैंक के व्यवस्थापक व अध्यक्ष ने कुछ लोगों को रुपए लौटाने का आश्वासन दिया है।