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दूसरे दिन भी तालाबंदी, कई मांगें पूरी नहीं, वार्ता विफल

एनएसयूआई के बैनर तले दूसरे दिन भी तालाबंदी जारी रही। इस दौरान महाविद्यालय के मुख्य द्वार पर तालाबंदी की गई।

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प्रदर्शन

बीकानेर . राजकीय डूंगर महाविद्यालय में व्याप्त समस्याओं को लेकर मंगलवार को एनएसयूआई के बैनर तले दूसरे दिन भी तालाबंदी जारी रही। इस दौरान महाविद्यालय के मुख्य द्वार पर तालाबंदी की गई। इसके साथ ही महाविद्यालय प्रशासन और छात्र प्रतिनिधियों के बीच वार्ता हुई लेकिन कुछ मांगों को लेकर वार्ता पूरी नहीं हो पाई।

छात्र प्रतिनिधिमण्डल ने निर्णय लिया कि आंदोलन और उग्र किया जाएगा और छात्रों की मांगों को मानने के लिए मजबूर किया जाएगा। एनएसयूआई जिलाध्यक्ष रामनिवास कूकणा ने कहा कि महाविद्यालय के विद्यार्थी सड़कों पर बैठे हैं, लेकिन प्रशासन अपनी हठधर्मिता को अपनाए हुए है। इससे यह अनुमान लगाया जा सकता है कि महाविद्यालय की प्राचार्य महज औपचारिकताएं निभाने के लिए नियुक्त की गई हैं।

छात्रसंघ अध्यक्ष अशोक बुडि़या ने कहा कि महाविद्यालय प्रशासन छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए महाविद्यालय के सर्वांगीण विकास एवं छात्र हितों को ध्यान में रखते हुए अपने पूर्वाग्रहों को छोड़कर निर्णय लें। छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष विजयपाल बेनीवाल ने कहा कि

विद्यार्थियों के विकास शुल्क के रूप में वसूले जा रहे पैसों को महाविद्यालय प्रशासन विद्यार्थियों के हितों में खर्च नहीं करके गबन करने का कार्य कर रहा है। इस अवसर पर इरफान कायमखानी, मनीष डेलू, निम्बाराम गोदारा, पूनमचंद कस्वां, ओमप्रकाश बाना, कृष्णकुमार गोदारा आदि उपस्थित थे।

पद्मावती फिल्म के प्रदर्शन पर रोक की मांग
बीकानेर. अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा ने संजय लीला भंसाली की फिल्म पद्मावती के प्रदर्शन पर रोक लगाने की मांग की है। महासभा के जिलाध्यक्ष तेजसिंह मेलिया ने इस संबंध में एक ज्ञापन मुख्यमंत्री को भेजा है। इसमें आरोप लगाया है कि यह फिल्म प्रदर्शित हुई तो इसका गलत संदेश समाज में जाएगा। महासभा के पदाधिकारियों ने कानूनी कार्रवाई करने की भी चेतावनी दी।

सेंसर बोर्ड को लिखा पत्र
भाजपा नेता सुरेन्द्र सिंह शेखावत ने पद्मावती फिल्म को लेकर सेंसर बोर्ड को पत्र लिखा है। इसमें कहा गया है कि इतिहास पर काल्पनिक फिल्म बने तो वह ऐतिहासिक प्रमाणों के विपरीत नहीं होनी चाहिए, यह देखना सेंसर बोर्ड का काम है।

पत्र में कहा है कि पद्मावती हमारे इतिहास की साझी विरासत है। ऐसे संवेदनशील विषय पर बनी फिल्म को लेकर सेंसर बोर्ड को गंभीर होना चाहिए। साथ ही इसकी जांच कराई जाए और ऐतिहासिक प्रमाणों के विपरीत हो तो इस पर रोक लगानी चाहिए।