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अपनों से पूछते थे, कैसे हैं बीकानेर के हाल

कार्टूनिस्ट सुधीर तैलंग से जब भी कोई बीकानेरी मिलता तो उनका एक ही सवाल होता, कैसे हैं बीकानेर के हाल

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Shankar Sharma

Feb 07, 2016

Bikaner photo

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बीकानेर. कार्टूनिस्ट सुधीर तैलंग से जब भी कोई बीकानेरी मिलता तो उनका एक ही सवाल होता, कैसे हैं बीकानेर के हाल। बीकानेर से दिल्ली सीधी रेल सेवा के लिए भी तैलंग को याद किया जाएगा। असल में तत्कालीन रेल मंत्री ममता बनर्जी के समय उन्होंने दिल्ली के प्रमुख स्थानों पर कुछ हॉर्डिंग्स लगाए थे, जिसमें उकेरे गए कार्टून में उन्होंने दिल्ली से बीकानेर के लिए काफी समय से बंद पड़ी सीधी रेल सेवा नहीं होने की पीड़़ा को दर्शाया था।

इसके बाद आगामी रेल बजट में सीधी रेल सेवा आरम्भ हुई थी। अपने कार्टून की बदौलत उन्होंने देश के विभिन्न हिस्सों में जनसमस्याओं को प्रमुखता से उठाया। तैलंग के चचेरे भाई अमित गोस्वामी के अनुसार सुधीर तैलंग का जन्म 1960 में बीकानेर के गोस्वामी चौक में हुआ एवं शिक्षा-दीक्षा भी यहीं हुई। राजकीय डूंगर कॉलेज से बीएससी एवं एमए किया। उसके बाद वे दिल्ली चले गए थे। उन्होंने इलस्ट्रेटेड वीकली, नवभारत टाइम्स, हिन्दुस्तान टाइम्स, इंडियन एक्सप्रेस एवं एशियन एज में कार्य किया।

उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर बनाए कार्टूनों की शृंखला पुस्तक नो प्राइम मिनिस्टर लांच की थी। प्रसिद्ध पत्रकार रजत शर्मा के टीवी कार्यक्रम आपकी अदालत में भी वे बतौर जज के रूप में शामिल हुए थे। तैलंग को अपनी उपलब्धि के चलते वर्ष 2004 में पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया गया। गोस्वामी के अनुसार भले ही वे पूर्ण रूप से दिल्ली निवासी हो चुके थे, लेकिन उनकी धड़कने बीकानेर की आबो-हवा में रमती थी। उनका बीकानेर और यहां के लोगों से खासा लगाव था। समय-समय पर उनका बीकानेर आना भी होता था।

तैलंग समाज विकास समिति ने दी श्रद्धांजलि
राजस्थान गोस्वामी भट्ट तैलंग समाज विकास समिति ने कार्टूनिस्ट पदमश्री सुधीर तैलंग के निधन पर श्रद्धासुमन अर्पित किए। समिति के प्रदेश अध्यक्ष नीरज गोस्वामी ने बताया कि सुधीर के निधन से अपूरणीय क्षति पहुंची है।

आखिरी समय में भी बीकानेर की याद
तैलंग के चाचा गिरधर गोस्वामी के अनुसार तैलंग ने पिछले महीने ही बीकानेर आने की इच्छा जताई थी। गोस्वामी के अनुसार उन्होंने अपनी बातचीत में कहा कि था कि वे जब बीकानेर आएंगे तो बीकानेर की गलियों और चौक में लगे पाटों को देखना चाहेंगे। साथ ही वे यहां के लोगों के साथ अपनी पुरानी यादों को तरोताजा करेंगे। बीकानेरी रबड़ी उनकी खास पसंद थी, जब भी वे बीकानेर आते इसका स्वाद चखना नहीं भूलते थे। पद्मश्री सम्मान मिलने पर उनका बीकानेर में विभिन्न संगठनों की ओर से सम्मान भी किया गया था। इसी प्रकार दिल्ली में ऑटो चालकों की समस्याओं को भी उन्होंने अपने कार्टून के माध्यम से उठाया था। ये बड़ा चर्चा का विषय रहा था।