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Maha Shivaratri 2019: 1800 साल पुरानी अजएकपाद की प्रतिमा

Maha Shivaratri 2019: धर्म ग्रन्थों के अनुसार मनुष्य जीवन पर नक्षत्रों का विशेष प्रभाव रहता है। जन्म के साथ उसके हर कार्य में नक्षत्र विशेष महत्व रखते हैं।

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Maha Shivaratri 2019 special news

महाशिवरात्रि विशेष- 1800 साल पुरानी अजएकपाद की प्रतिमा

विमल छंगाणी
बीकानेर. धर्म ग्रन्थों के अनुसार मनुष्य जीवन पर नक्षत्रों का विशेष प्रभाव रहता है। जन्म के साथ उसके हर कार्य में नक्षत्र विशेष महत्व रखते हैं। ग्रन्थों में २७ नक्षत्रों का उल्लेख है। हर नक्षत्र के अधिष्ठाता देवता और वृक्ष बताए गए हैं। इनमें पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र का विशेष महत्व बताया गया है। पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र के अधिष्ठाता देवता अजएकपाद (अजैकपाद) हैं। कुछ स्थानों पर भगवान शिव के अन्य अवतारों में भी अजपाद का उल्लेख है। बीकानेर राजकीय संग्रहालय में आरम्भिक गुप्तकाल शुंग-कुषाण काल की दुर्लभ अजएकपाद की प्रतिमा संरक्षित है। बताया जाता है कि यह प्रतिमा 1800 से 1900 साल पुरानी है, जो सूरतगढ़ के पास रंगमहल से मिली थी। बीकानेर में यह प्रतिमा रियासतकाल से संग्रहालय में सुरक्षित और संरक्षित है। यहां आने वाले हर शोधार्थी और पर्यटक के लिए यह आकर्षण का केन्द्र है।

सिर बकरे का
अजएकपाद की प्रतिमा टेरीकोटा (मृण) मूर्ति है। आकार १३ इंच गुणा ८ इंच है। पुरातत्व विभाग एवं संग्रहालय विभाग के अधीक्षक निरंजन पुरोहित के अनुसार अजएकपाद देवता का मुंह बकरे का और एक पैर है। पैरे हाथी के
पैर जैसा है। दो हाथ हैं। एक हाथ में बड़ा फल है।

पूजन का विधान
ग्रंथो में नक्षत्रों, उनके देवताओं, पीडि़त व्यक्ति के लाभ के लिए नक्षत्रों के यथा विधि पूजन का उल्लेख है। अजएकपाद पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र का देवता है। जन्मकुण्डली में यह नक्षत्र पीडि़त करता है, तो अजएकपाद देवता के यथा विधि पूजन का विधान है। पं. बलदेव जोशी बताते हैं कि सामान्यतया होली के अवसर पर पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र रहता है। इस बार ४ से १८ मार्च तक यह नक्षत्र रहेगा। इस नक्षत्र के दौरान आनन्द और उल्लास का वातावरण रहता है। जोशी ने कहा कि इनका वृक्ष कदम्ब का है।