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चिकित्सा व्यवस्थाएं बेपटरी, बागड़ी अस्पताल बना रेफरल

खा ब्लॉक में सरकारी डॉक्टरों का टोटासरकारी इलाज को डायवर्ट किया जा रहा है निजी अस्पतालों में

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Medical systems disfigurement, Bagri Hospital made referral

Medical systems disfigurement, Bagri Hospital made referral

बीकानेर. नोखा. सरकारी तौर पर सुदृढ़ इलाज करने के लिए कई योजनाएं हैं लेकिन जहां इलाज मिलना है। वहां की व्यवस्थाएं लचर है। सरकारी नि:शुल्क इलाज की आस लेकर पहुंचने वाले मरीज को येन-केन प्रकरेण निजी अस्पतालों व क्लीनिक का रास्ता दिखाया जा रहा है।

नोखा क्षेत्र के ग्रामीण अस्पतालों में कम डॉक्टरों से काम चलाया जा रहा है तो शहर का बागड़ी अस्पताल रेफरल एजेंसी के नाम से जाना जाने लगा है। यहां हादसे में घायल मरीज को जब इलाज के लिए लाया जाता है तो उसका प्राथमिक उपचार कर बीकानेर रेफर कर दिया जाता है।

कुछ लोग तो इसे खैराती अस्पताल भी कहने लगे हैं। यानी नि:शुल्क इलाज की आस में मरीज पहुंचता है, जिसे कुछ दिन भर्ती रखने के बाद निजी अस्पतालों या विशेषज्ञ डॉक्टर के निजी क्लीनिक में इलाज कराने का रास्ता दिखा दिया जाता है।

भले ही अस्पताल में सभी जांच सुविधा हो। इससे कहा जा सकता है कि सरकारी अस्पताल में पहुंचने के बाद मरीज को स्वस्थ होने के लिए निजी अस्पताल, नर्सिंग होम व क्लीनिकों को सहारा लेना पड़ता है।


कम डॉक्टरों से चला रहे काम

सूत्रों का कहना है कि नोखा ब्लॉक में जितने डॉक्टरों की आवश्यकता है। उस हिसाब से काफी कम डॉक्टर हैं। नोखा ब्लॉक में ४१ डॉक्टरों की आवश्यकता हैं, जिसमें पदस्थ 29 हैं। इनमें से भी अधिकांश डॉक्टरों के पास विभाग की चल रही योजनाओं का भार है।

मोटे तोर पर नोखा ग्रामीण क्षेत्र में स्वीकृत १४ डॉक्टर में से 10 पदस्थ व4 पद रिक्त, नोखा सीएचसी में स्वीकृत 16 डॉक्टरों में से 13 पदस्थ व तीन पद रिक्त, जसरासर सीएचसी में स्वीकृत 6 डॉक्टरों में से 5 पदस्थ व दो पद रिक्त हैं। पांचू सीएचसी में स्वीकृत 5 डॉक्टरों में से दो पदस्थ हैं और तीन पद रिक्त हैं।

इलाज नहीं होने की शिकायते
ग्रामीणों का कहना है कि गांव के उपस्वास्थ्य केंद्र अधिकतर समय बंद रहते हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में नीम-हकीम, झोलाछाप के यहां इलाज कराने जाते हैं। जब मर्ज ठीक नहीं होता है, तो सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचते हैं, वहां पर कुछ दिन दवा देने के बाद रास्ता निजी अस्पतालों व क्लीनिकों का दिखा दिया जाता है। इससे मरीज का मर्ज बढ़ता जाता है। अक्सर ऐसी शिकायतें खूब मिलती है। सीएचसी पर डॉक्टर ओपीडी के बजाय अपने निजी क्लीनिकों में ही मरीजों का बेहतर इलाज करना पंसद करते हैं।

स्त्री व प्रसूति रोग विशेषज्ञ की कमी
ब्लॉक स्तर पर स्त्री व प्रसूति रोग विशेषज्ञ महिला डॉक्टरों की कमी है। प्रसव कराने की पर्याप्त व्यवस्थाएं नहीं है। प्रसव अप्रशिक्षित हाथों से कराए जा रहे हैं। जटिल प्रसव हो तो ऑपरेशन के लिए महिलाओं को बीकानेर रेफर कर दिया जाता है या फिर निजी अस्पतालों में जाना पड़ता है। इस दौरान जच्चा व बच्चा दोनों की जान को खतरा बना रहता है। गत दिनों नोखा के सरकारी अस्पताल में इलाज कराने आई श्रीबालाजी की प्रसूता को बीकानेर रेफर करने पर रास्ते में मौत हो गई थी।