
मरुधरा में अब मेवाड़ राजघराने के घोड़े का वंशज भी दौड़ता हुआ नजर आएगा। उदयपुर के महाराजा अरविंद सिंह का घोड़ा राजरतन का वंशज इन दिनों बीकानेर के राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केन्द्र में लालन-पालन हो रहा है। उदयपुर राजपरिवार में पीढि़यों से घोड़ों की देखरेख करने वाले परिवार के सदस्यों ने महाराजा के घोड़े को चेतक का वंशज बताया है।
राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केन्द्र के वैज्ञानिक फरवरी 2006 में उदयपुर के महाराजा के घोड़े राजरतन का सिमन लेकर आए थे। जिससे यहां चार घोडि़यों रुचि, कृष्णा, रजिया, कजरी का क्रॉस कराया गया। कजरी घोड़ी से मेवाड़ राजघराने के घोड़े का वंशज पैदा हुआ है।
इस मेवाड़ के घोड़े के वंशज का नाम कमल रखा गया है। करीब ढाई साल का कमल काले रंग का है। वहीं राजरतन व्हाइट व लाल रंग का तथा माता कजरी काले रंग की है। सिमन लाकर घोडि़यों के साथ क्रॉस कराने के प्रोजेक्ट से वैज्ञानिक डॉ. त्रिरूमाला राव व डॉ. संजय रवि जुड़े रहे।
मेवाड़ के घोड़े की मांग
मेवाड़ के घोड़े महाराणा प्रताप के घोड़े चेतक के वंशज माने जाते हैं। इसकी मांग को देखते हुए वैज्ञानिकों ने मेवाड़ के महाराजा के घोड़े का सिमन लिया। इस नस्ल के घोड़े स्वामी के प्रति ईमानदार होते है।
मिली सफलता
मेवाड़ के महाराजा के घोड़े का सिमन लाकर उस नश्ल के घोड़े तैयार करने में सफलता मिली है। इस मेवाड़ के वंशज का यहां लालन-पालन हो रहा है। इस प्रोजेक्ट की सफलता से टीम उत्साहित है।
डॉ. एससी मेहता, प्रभारी, राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केन्द्र, बीकानेर
पर्यटकों ने उठाया तांगा व घुड़सवारी का लुत्फ...
राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केन्द्र में पर्यटकों की रुचि बढऩे लगी है। अश्वों को देखने के लिए पर्यटक आने लगे हैं। इनमें देशी व विदेशी पर्यटक भी तांगा सवारी व घुड़सवारी का लुत्फ उठाते हुए नजर आ रहे हैं। पर्यटक यहां घोड़ों की विभिन्न नस्लों की जानकारी ले रहे हैं। इसके साथ ही धोरे पर बनी झोपड़ी का भी आनंद ले रहे हैं।
Published on:
01 Nov 2017 11:39 am
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