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प्रवासी पक्षियों से जोड़बीड़ आबाद, बाज, चील और गिद्ध आने लगे नजर

Bikaner News: रिजर्व कंजर्वेशन: पहुंचे प्रवासी पक्षी, यहां आते हैं चील, गिद्ध और बाज, अभी दो हजार से ज्यादा पक्षी मौजूद, सर्दियों में 5 हजार हो जाती है तादाद

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प्रवासी पक्षियों से जोड़बीड़ आबाद, बाज, चील और गिद्ध आने लगे नजर

प्रवासी पक्षियों से जोड़बीड़ आबाद, बाज, चील और गिद्ध आने लगे नजर

दिनेश कुमार स्वामी

बीकानेर. साढ़े पांच हजार वर्ग किलोमीटर में फैला जोड़बीड़ कंजर्वेशन रिजर्व Jodbir Conservation Reserve इन दिनों प्रवासी पक्षियों migratory birds के आने का इंतजार कर रहा है। हर साल अक्टूबर के अंत तक यह प्रवासी पक्षियों से आबाद हो जाता है। पांच हजार प्रवासी पक्षियों के कलरव chirping of birds से गूंजने लगता है। परन्तु ग्लोबल स्तर पर वायुमंडल में आए परिवर्तन का के चलते यह पक्षी अभी अगले दस-बारह दिन में यहां पहुंचेंगे। इस बार उन्होंने करीब दो हजार किलोमीटर दूर कजाकिस्तान, उज्जबेकिस्तान, मंगोलिया, ओमान, रोमानिया से देरी से परवाज भरी है। अभी करीब दो हजार प्रवासी पक्षी जोड़बीड़ में डेरा डाले हुए हैं।

जोड़बीड़ में जहां शिकारी पक्षी चील Eagle और बाज Hawk आते हैं। वहीं मांसभक्षी प्रवासी गिद्ध vulture की दस प्रजातियां सर्दियों में प्रवास करती हैं। कजाकिस्तान समेत उनके मूल आवास स्थल पर अक्टूबर में सर्दी बढ़ जाती और पानी सूख जाता है। ऐसे में यह पक्षी भोजन और पानी की तलाश में रवाना होते हैं। चूंकि जोड़बीड़ एशिया में मृत पशुओं का सबसे बड़ा डम्पिंग यार्ड है। ऐसे में मांस भक्षी वहां से बीकानेर के लिए अपने अर्द्ध वयस्क बच्चों के साथ परवाज भरते हैं। जोड़बीड़ में रेप्टाइल्स और जमीन के अंदर बिल बनाकर रहने वाले जीव बहुत ज्यादा तादाद में हैं। इसी वजह से यहां पर चील-बाज जैसे शिकारी पक्षी आते हैं। जो इन रेप्टाइल्स का शिकार कर अपना पेट भरते हैं।

अभी यह पहुंचे कंजर्वेशन क्षेत्र

पक्षी विशेषज्ञों के अनुसार कंजर्वेशन क्षेत्र में इन दिनों एक हजार से ज्यादा इजिप्शन वल्चर (भारतीय गिद्ध) डेरा डाले हुए हैं। ब्लैक ईयर काइट black eared kite (चील) भी नजर आई है। साथ ही करीब 200 स्टेपी ईगल steppe eagle, टोनी ईगल, शॉर्ट टोड इगल, इम्पीरियर इगल और ग्रेटर स्पॉटेड इगल मौजूद हैं। शिकारी पक्षी लगर फोल्कन, सबसे खूबसूरत बाज लॉन्ग लेग बजर्ड long leg buzzard भी इक्का-दुक्का नजर आ रही हैं। मांस हेरियर, लम्बी गर्दन वाले गिद्ध, यूरेशियन ग्रिफन eurasian griffon और हिमालयन ग्रिफन भी आए हैं। अभी गिद्धों की आधा दर्जन से अधिक प्रजाति और आने वाली है। दुनियाभर में गिने-चुने बचे दुलर्भ पक्षी सोशियेबल लेपविंग पन्द्रह दिन से यहां डेरा डाले है। पीली आंख वाले कबूतर भी खूब आए हुए हैं।

तादाद बढ़ने का इंतजार

पक्षी प्रेमी डॉ. जीतू सोलंकी ने बताया कि शेकर फोल्कन shaker falcon (बाज), आठ हजार किलोमीटर दूर जर्मनी से व्हाइट टेल्ड इगल के आने का इंतजार है। अभी जो पक्षी आए हैं, उनकी संख्या भी बढ़नी है। ब्लैक बेलिड सेनग्राउज विदेशी (बटाबड़ी) साल 2016 के बाद नहीं दिखी है। इस बार बारिश अच्छी होने से यह भी आएंगी। जोड़बीड़ में करीब दो से ढाई हजार प्रवासी पक्षी हैं। महीनेभर में तादाद दोगुणा हो जाएगी।

वहां सर्दी देरी से आना वजह

पक्षी विशेषज्ञ डॉ. दाऊलाल वोहरा ने बताया कि ओमान, उज्जबेकिस्तान, मंगोलिया आदि क्षेत्रों में इस बार सर्दी देरी से आई है। ऐसे में प्रवासी पक्षी भी देरी से रवाना हुए हैं। अभी जो पहुंचे हैं, उनमें तीस प्रतिशत पक्षियों के वयस्क से लेकर छोटे बच्चे तक है। चार-पांच दिन पहले ही वहां से बड़ी संख्या में पक्षी रवाना हुए हैं। पन्द्रह दिन में हर साल की तरह यह तादाद चार हजार को पार कर जाएगी। दिसम्बर-जनवरी में सर्दी शवाब पर होगी, तब यह संख्या पांच हजार तक पहुंच जाएगी।