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अफगानिस्तान के रास्ते आ रहा पाकिस्तानी मोठ, हमारे किसानों के हक पर कर रहा चोट

पाकिस्तानी मोठ से माल और प्रतिस्पर्द्धा बढ़ने के कारण स्थानीय मोठ के भाव किसानों को पूरे नहीं मिल रहे। पाक में मोठ की सीमित खपत के चलते वहां से मोठ कम भाव में निर्यात हो रहा है। जो अफगानिस्तान के रास्ते बॉम्बे पोर्ट और फिर महाराष्ट्र, गुजरात, दिल्ली और राजस्थान समेत कई राज्यों तक पहुंच गया है।

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अफगानिस्तान के रास्ते आ रहा पाकिस्तानी मोठ, हमारे किसानों के हक पर कर रहा चोट

अफगानिस्तान के रास्ते आ रहा पाकिस्तानी मोठ, हमारे किसानों के हक पर कर रहा चोट

इस बार अफगानिस्तान के रास्ते पाकिस्तान का मोठ प्रदेश में पहुंच रहा है। इसकी मार प्रदेश के सर्वाधिक मोठ उत्पादक बीकानेर क्षेत्र के किसानों पर पड़ रही है। पाकिस्तानी मोठ से माल और प्रतिस्पर्द्धा बढ़ने के कारण स्थानीय मोठ के भाव किसानों को पूरे नहीं मिल रहे। पाक में मोठ की सीमित खपत के चलते वहां से मोठ कम भाव में निर्यात हो रहा है। जो अफगानिस्तान के रास्ते बॉम्बे पोर्ट और फिर महाराष्ट्र, गुजरात, दिल्ली और राजस्थान समेत कई राज्यों तक पहुंच गया है। श्रीगंगानगर की एक फर्म के जरिए यह मोठ बीकानेर के लूणकरनसर मंडी तक भी पहुंचा है। पाक का मोठ सस्ता होने के साथ गुणवत्ता में बाड़मेर मोठ जैसा ही है। नोखा मंडी के व्यापारी पृथ्वीराज बताते हैं, बाड़मेर बॉर्डर से सटे पाकिस्तान के इलाकों में इस बार मोठ की अच्छी पैदावार हुई है। वहां इसकी खपत कम है, इसलिए बड़ी मात्रा में कम भाव में निर्यात किया गया है।

मोटे अनाज के आड़े आया विदेशी मोठ

मोटे अनाज को बढ़ावा देने की प्रधानमंत्री की सोच से मोठ की पूछ बढ़ी और इसके भाव भी बढ़े थे, लेकिन अब विदेशी मोठ इसका फायदा किसान तक नहीं पहुंचने दे रहा है। अफगानिस्तान के रास्ते पाक के मोठ की उपज समुद्री मार्ग से बोम्बे पार्ट से आयात हो रही है। मिल मालिकों को पाकिस्तानी मोठ 6200 रुपए प्रति क्विंटल तक मिल रहा है। ऐसे में व्यापारी भी स्थानीय मोठ खरीदने की जगह इस माल की खरीद कर रहे हैं।

8 हजार से 6 हजारतक पहुंचे भाव

लूणकरनसर अनाज मण्डी के आढ़त व्यापारी हनुमान गोदारा और अनिल भूरा ने बताया कि प्रदेश की सबसे बड़ी मोठ मंडी नोखा, लूणकरनसर समेत अन्य मण्डियों में इन दिनों किसान मोठ की उपज बेचने के लिए ला रहे हैं। गुणवत्ता के हिसाब से उन्हें 5500 से 6200 प्रति क्विंटल के भाव मिल रहे हैं। जबकि इसकी आवक शुरू होने पर भाव 8000 रुपए प्रति क्विंटल खुले थे। धीरे-धीरे पाक से मोठ आने शुरू होने के साथ ही भाव गिरने शुरू हो गए। भाव कम होने से किसानों को मोठ का लागत मूल्य भी पूरा नहीं मिल पा रहा है।

प्रदेश में मोठ की भरपूर पैदावार, इस बार नहीं हो रहा निर्यात
प्रदेश में बीकानेर, नागौर, बाड़मेर, चूरू के बारानी क्षेत्र में मोठ की भरपूर पैदावार होती है। एशिया की सबसे बड़ी मोठ मंडी नोखा में है। लेकिन इस बार विदेशी मोठ के सस्ता मिलने के चलते दूसरे राज्यों में हमारे मोठ की डिमांड कम हो गई है।

मोठ की ज्यादा खपत भुजिया इंडस्ट्री में
देश में मोठ की सबसे ज्याद खपत बीकानेर में होती है। यहां भुजिया और बड़ी में मोठ का ही उपयोग होता है। भुजिया इंडस्ट्री का देश में सबसे बड़ा केन्द्र बीकानेर है। मोठ यहां का उत्पाद है, ऐसे में यहां के भुजिया का स्वाद देश के अन्य हिस्सों में बनने वाले भुजिया या बड़ी से अलग होता है।