
निर्जला एकादशी पर चला दान-पुण्य का दौर
बीकानेर. निर्जला एकादशी गुरुवार को श्रद्धा पूर्वक मनाई गई। बड़ी संख्या में लोगों ने उपवास रखा। जगह-जगह शीतल जल, पेयजल पदार्थ का वितरण किया जाएगा। नगर के प्रमुख वैष्वव मंदिरों में सुबह से लेकर शाम तक दर्शनार्थियों का तांता लगा रहा। लक्ष्मीनाथजी मंदिर में सुबह से ही दर्शनार्थियों की कतारें लगी रही। बाजारों में शीतल पेय ही स्टालें लगाकर श्रद्धालु दिन भर राहगीरों को शरबत, ज्यूस, शीतल जल आदि पिलाते रहे।
पर्व को लेकर बाजारों में दिनभर भीड़ रही। आम, चीणी से बने ओळों व सिंगाड़ा आटे व चीनी से निर्मित सेवइयों की खरीदारी जमकर हुई। शहरी क्षेत्र में बहन बेटियों के यहां मिठाई (सगार), आम, ओळें आदि भेजने की परम्परा निभाई गई। मिठाइयों की दुकानों पर भी खरीदारों की भीड़ रही।
यह है महत्व: निर्जला एकादशी का शास्त्रों में भी खास महत्व बताया गया है। पंचागकर्ता पंडित राजेन्द्र किराड़ू के अनुसार महाभारत काल में भीम ने इस उपवास को रखा था। इस कारण इसे भीमसेन एकादशी भी कहते हैं। इस दिन भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के लिए निर्जल (बिना पानी) के उपवास किया जाता है।
ठण्डाई के ओळे: निर्जला एकादशी पर चीनी से बने सामान्य ओळों के साथ ही ठण्डाई (खसखस) से बने स्पेशल ओळे भी खास पसंद किए जा रहे हैं। बाजार में यह २४० रुपए प्रति किलो बिक रहे हैं। इसके साथ ही सामान्य चीनी के ओळे ६० रुपए प्रति किलो है। स्पेशल डूंगरशाही सेव १२० रुपए किलो, स्पेशल सिंगाड़ा सेव ८०
रुपए व सामान्य सेव ६० रुपए प्रति किलो है।
Published on:
13 Jun 2019 02:37 pm
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