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राज्य के आधे सैकण्डरी स्कूलों में खेलकूद की हालत खस्ता, कहीं खेल मैदान की कमी तो कहीं खेल सामग्री की कमी

स्कूलों में खेल के मैदान और पीटीआई दोनों हैं वहां खेल सामग्री नहीं है।

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राज्य में माध्यमिक शिक्षा निदेशालय के अधीन आने वाली साढ़े तेरह हजार स्कूलों में से आधे स्कूलों के पास खेल मैदान ही नहीं हैं अथवा खेल मैदानों पर अतिक्रमण हैं जबकि अधिकांश स्कूलों में पीटीआई हैं और वे विद्यार्थियों को खिलाने के नाम पर वेतन ले रहे हैं। इससे भी बदतर हालत यह है कि जिन स्कूलों में खेल के मैदान और पीटीआई दोनों हैं वहां खेल सामग्री नहीं है।

कमोबेश यही हालत राज्य के सात शाला क्रीडा संगम, 13 क्रीड़ा संगम केन्द्र तथा दो खेल छात्रावासों के हैं। शिक्षा निदेशालय का खेलकूद अनुभाग के पास खेल संसाधनों की मद में अलग से कोई बजट नहीं है। निदेशालय की अन्य मदों से इस अनुभाग को सालाना 40-45 लाख रुपए खेल संसाधनों के लिए मिल जाते हैं। माध्यमिक शिक्षा निदेशालय के खेल अनुभाग में 18 तरह के राज्य एवं राष्ट्रीय स्तरीय खेलों का प्रावधान किया गया है।

कायदे से तो स्कूलों में शिक्षा के साथ खेलकूद अनिवार्य हैं। इसी अनिवार्यता के तहत पीटीआई की नियुक्तियां दी गई हैं। यही नहीं खेलों के लिए अनुभाग ने सत्र पर्यन्त प्रशिक्षण केन्द्र, शाला क्रीडा संगम केन्द्र, रेफरी क्लिनिक, ग्रीष्मकालीन खेलकूद का प्रावधान किया हैं, परन्तु इनमें से संसाधनों की कमियों का रोना रहता है।

कहने को राज्य सरकार टूर्नामेन्ट आयोजित करने वाले स्कूल को 50 हजार रुपए देती है। राष्ट्रीय स्तर पर स्वर्ण पद पाने वाले विद्यार्थी खिलाड़ी को 10 हजार , रजत पद वाले को साढे सात हजार तथा कास्यं पदक वाले को पांच हजार रुपए देती है।

यह है खेलसंसाधनों की स्थिति
- राज्य में कुल माध्यमिक उच्च माध्यमिक स्कूल - 13 हजार 552
- खेल के मैदान -7 हजार 785 स्कूलों में
- बिना खेल मैदान वाली स्कूलें -5 हजार 767
- खेल मैदानों पर अतिक्रमण- 1 हजार 497 स्कूलों में
- पीटीआई प्रथम श्रेणी स्वीकृत पद 255 और कार्यरत 41
- पीटीआई द्वितीय श्रेणी स्वीकृत पद 3 हजार 385 और कार्यरत 2960
- पीटीआई तृतीय श्रेणी स्वीकृत पद 9 हजार 917 और कार्यरत 9 हजार 67

स्कूली खेलों में होगा सुधार
राज्य की माध्यमिक शिक्षा निदेशालय की स्कूलों में खेल संसाधन बढ़ाकर अगले सत्र से खेलों की स्थिति में सुधार का प्रयास किया जाएगा।
नथमल डिडेल, निदेशक, माध्यमिक शिक्षा निदेशालय।

खेलों में समाज करता है सहयोग
स्कूलों में खेलों के लिए छात्रों से फीस ली जाती है। इसी फीस से खेलों के खर्चे निकाले जाते है। खेलों की स्थिति में सुधार हो रहा है।
जीवन शंकर शर्मा, उपनिदेशक, खेल अनुभाग मा. शि. निदेशालय।