
हिन्दी फिल्मों के इतिहास से आमजन को रूबरू करवाने के लिए ओल्ड फिल्म पोस्टर प्रदर्शनी का आगाज रविवार को हुआ। महारानी सुदर्शना कला दीर्घा में शुरू हुई प्रदर्शनी के पहले दिन बड़ी संख्या में शहरवासियों ने प्रदर्शनी का अवलोकन किया व प्रदर्शित पोस्टरों को देख अपनी यादें ताजा की।
अमन कला केन्द्र व नौशाद एकेडमी ऑफ हिन्दुस्तानी संगीत के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित पोस्टर प्रदर्शनी में हिन्दी फिल्मों के करीब दो सौ पोस्टर व बैनर प्रदर्शित किए हैं। वर्ष 1930 से 2000 तक रिलीज हुई हिन्दी फिल्मों में से चुनिन्दा फिल्मों के पोस्टर व फोटोग्राफ प्रदर्शित किए गए है।
प्रदर्शनी के उद्घाटन अवसर पर इकबाल हुसैन समेजा, मनोज बजाज, डॉ. मीना आसोपा, अनवर अली रंगरेज, डॉ. सुधीर शर्मा, विपिन जैन, डॉ. यश बंशी माथुर, धमेन्द्र सोनी, तरुण तंवर, एम आर मुगल अतिथि रूप में उपस्थित थे। केन्द्र अध्यक्ष एम रफीक कादरी के अनुसार सोमवार को प्रदर्शनी आमजन के अवलोकन के लिए खुली रहेेगी व संगीत कार्यक्रम का आयोजन होगा।
70 वर्ष, 200 पोस्टर
पहली हिन्दी फिल्म आलमआरा (1930) से लेकर वर्ष 2000 तक रिलीज हुई हिन्दी फिल्मों के चुनिन्दा पोस्टर व बैनर प्रदर्शनी में प्रदर्शित किए गए। प्रदर्शनी में देश की आजादी से पहले बनी फिल्मों पुकार (1939) के साथ देश की आजादी के बाद पचास के दशक में रिलीज हुई हिन्दी फिल्मों जोगन, आवारा, बैजू बावरा, आह, अनारकली, श्री 420, मदर इण्डिया, दो आंखें बारह हाथ, प्यासा, गूंज उठी शहनाई, रानी रूपमति, कोहिनूर, लव इन शिमला फिल्मों के पोस्टर प्रदर्शित किए गए है।
वहीं मुगले आजम, दोस्ती, इंसानियत, ताजमहल, प्रोफेसर, वक्त, गंगा-जमुना, फागुन, मेरा गांव मेरा देश, शोले, मिशन कशमीर, प्यार किया तो डरना क्या, बोर्डर सहित सन् 2000 तक रिलीज हुई फिल्मों व राजस्थानी फिल्म बाई चाली सासरिये के पोस्टर प्रदर्शित किए गए हैं।
शूटिंग फोटोग्राफ व ग्रामोफोन रिकॉर्ड
प्रदर्शनी शूटिंग फोटोग्राफ व ग्रामोफोन रिकार्ड भी प्रदर्शित किए गए हैं। कादरी के अनुसार दास्तानें लैला मजनूं तथा मनोज कुमार की फिल्म पूकार की शूटिंग बीकानेर में हुई थी। इन फिल्मों के शूटिंग फोटोग्राफ व हिन्दी फिल्मों के गीतों के ग्रामोफोन रिकार्ड भी प्रदर्शित किए गए हैं।

Published on:
04 Dec 2017 12:50 pm
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