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दो माह में ही बेपटरी हुई पास व्यवस्था

मरीजों के पास अब रहती है भीड़, पॉलीथिन में ले जा रहे लोग सामान, सुरक्षाकर्मी कर रहे खानापूर्ति

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pbm hospital

संभाग के सबसे बड़े पीबीएम अस्पताल में करीब दो महीने पहले शुरू की गई पास व्यवस्था बेपटरी हो गई है। वार्डों में मरीजों के पास फिर परिजनों की भीड़ जुटने लगी है। अस्पताल प्रशासन ने वार्डों में मरीजों के पास अनावश्यक भीड़ कम करने के लिए ही पास व्यवस्था लागू की थी, व्यवस्था दो महीने में ही धराशायी हो गई।

वार्डों में भर्ती मरीजों के पास तीन-चार परिजन मौजूद रहते हैं। चिकित्सकों के राउंड के समय उन्हें सुरक्षाकर्मी बाहर निकालते हैं। ऐसे में कई बार परिजनों के साथ सुरक्षाकर्मियों की बहस भी होती है। पीबीएम में तैनात सुरक्षा कर्मचारियों की लापरवाही से व्यवस्था सही ढंग से नहीं चल रही है। सुरक्षा कर्मचारियों की आंखों में धूल झोंककर परिजन बिना पास ही वार्डों में पहुंच जाते हैं। जहां सुरक्षाकर्मी तैनात रहते हैं, उन्हीं दरवाजों से मरीजों के परिजन पॉलीथिन की थैलियों में चाय-दूध ले जाते हैं।

जर्दा-गुटखा भी ले जाते हैं साथ
पीबीएम अस्पताल में जर्दा, गुटखा के पाउच ले जाने वालों के खिलाफ भी नियमित कार्रवाई नहीं हो रही है। नतीजन मरीजों से मिलने आने वाले लोग गुटखे के पाउच साथ ले जाते हैं। गुटखें की पीक से अस्पताल की गैलरियों व शौचालय की दीवारें सनी हुई हैं। पीबीएम में सुरक्षा के लिए जिम्मेदार अधिकारी महीने में एक-दो बार कार्रवाई कर इतिश्री कर लेते हैं।

जुर्माना लगाया जाए
पीबीएम प्रशासन की लापरवाही भी व्यवस्था बिगडऩे का कारण है। नई व्यवस्था लागू करने के बाद उसकी सही ढंग से मॉनिटरिंग नहीं की जा रही है। इसी ढिलाई के कारण व्यवस्था बिगड़ रही है। बिना पास और पॉलीथिन व गुटखा का पाउच ले जाने एवं खाते हुए पाए जाने पर जुर्माना लगाया जाए। सख्ती से निपटने से व्यवस्था में सुधार हो सकेगा।
लक्ष्मणराम मारु, आमजन

'पीबीएम प्रशासन को आमजन की पीड़ा से कोई सरोकार नहीं'
'राज्य सरकार की आम आदमी को सहज इलाज मुहैया कराने की मंशा पर स्थानीय पीबीएम प्रशासन पानी फेर रहा है। उसे आमजन की पीड़ा से कोई सरोकार नहीं है। अस्पताल प्रशासन चिकित्सा विभाग के अतिरिक्त निदेशक (प्रशासन) एवं पदेन संयुक्त शासन सचिव बीके अग्रवाल के आदेशों को भी नहीं मान रहा है।' ये आरोप रविवार को पीबीएम हेल्प कमेटी की ओर से आनंद निकेतन में प्रेसवार्ता में अध्यक्ष सुरेन्द्रसिंह राजपुरोहित ने लगाए।

राजपुरोहित ने कहा कि पीबीएम में हर माह करोड़ों रुपए के घोटाले हो रहे हैं। इनकी जांच के लिए आरएएस अधिकारी की अध्यक्षता में कमेटी गठित करने की मांग उठाई, लेकिन आज तक कमेटी गठित नहीं हुई। घोटालों को उजागर करने से नाराज पीबीएम एवं मेडिकल कॉलेज प्रशासन कमेटी के सदस्यों पर झूठे मामले दर्ज करवाकर आवाज दबाना चाहते हैं।

उन्होंने कहा कि आमजन के हित के लिए वे आंदोलन जारी रखेंगे। कमेटी सोमवार को जिला कलक्टर को अंतिम स्मरण-पत्र देगी और 15 दिन में दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई तो 18 दिसंबर से एसपी मेडिकल कॉलेज के सामने आमरण अनशन शुरू किया जाएगा।

लोक अदालत के निर्णय की पालना नहीं
कमेटी के अंकुर शुक्ला ने कहा कि पीबीएम प्रशासन न्यायालय के निर्णय को भी दरकिनार कर रहा है। 23 दिसंबर,16 को लोक अदालत ने गंभीर स्थिति में आने वाले मरीजों के सीटी स्केन ट्रोमा सेन्टर परिसर में ही नि:श़ुल्क करवाने को कहा था, लेकिन आज तक ट्रोमा सेन्टर में सीटी स्केन मशीन नहीं लगाई गई। शुक्ला ने कहा कि अस्पताल प्रशासन की ओर से स्थाई लोक अदालत के निर्णय की अवमानना के विरुद्ध वे कोर्ट ऑफ कन्टेम्प्ट लगाएंगे।