
क्रिकेट सट्टे
बीकानेर . क्रिकेट सट्टे के लिए बदनाम आईपीएल सीजन के मैच चलते हुए १२ दिन बीत जाने के बाद भी पुलिस के हाथ खाली है। रोजाना मैच के दौरान हर बॉल और शॉट पर दाव लगने के बावजूद पुलिस सटोरियों की गर्दन पर हाथ नहीं डाल पाई है।
इसके लिए पुलिस कमजोर खुफिया तंत्र को जिम्मेदार ठहरा रही है। हर साल जुआ अधिनियम के छोटे-मोटे मामले दर्ज कर आंकड़ों में पचास प्रतिशत की वृद्धि दर्शाकर अपनी पीढ़ ठोकने वाली पुलिस सटोरियों के सामने बोनी नजर आ रही है।
पुलिस आम तौर पर वारदात को सुलझाने के लिए सबसे पहले संबंधित पक्षों के मोबाइल फोन की कॉल डिटेल और लोकेशन की छानबीन करती है। अधिकांश अपराधिक वारदातें भी मोबाइल के सहारे पुलिस खोलती है। परन्तु इसी मोबाइल की बदौलत सट्टा कारोबारी पुलिस को छका रहे है। क्रिकेट सट्टे का शतप्रतिशत कारोबार अब मोबाइल फोन पर शिफ्ट हो चुका है।
एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि एेसा नहीं है कि पुलिस के पास क्रिकेट सट्टे कराने और करने वालों के मोबाइल नम्बर नहीं है। परन्तु बार-बार सटोरियों के अपनी लोकेशन बदलने और नीत नए मोबाइल नम्बरों का उपयोग करने से सटोरिए पुलिस की पकड़ में नहीं आ रहे है।
पुलिस ने आईपीएल शुरू होने से लेकर अब तक एक भी कार्रवाई को अंजाम नहीं दिया है जबकि सट्टा करने वाले खुद जिले में बड़े पैमाने पर सट्टा कारोबार चलने की बात कह रहे है। करीब डेढ़ साल पहले नोखा और बीकानेर में सक्रिय बड़े सटोरियों के अंतरराज्यीय स्तर तक तार जुड़े होने का खुलासा पुलिस कर चुकी है। तब सामने चर्चा में आए कुछ बड़े
नाम पुलिस के पर्दे से बाहर नहीं आए थे।
आंकड़ों की बाजीगरी
पुलिस हर बार अपनी साख बचाने के लिए छोटे बुकियों को पकड़ कर इतिश्री कर लेती है। पुलिस विभाग के आंकड़े बताते हैं कि हर साल क्रिकेट सट्टा, जुआ जैसे अपराध बढ़ रहे हैं। जिला पुलिस ने वर्ष २०१५ में जुआ अधिनियम में ३६९, वर्ष २०१६ में ४०९ और वर्ष २०१७ में ६०९ कार्रवाई की। जबकि वर्ष २०१८ में अब तक २४९ कार्रवाई दर्ज कर चुकी हैं।
Published on:
21 Apr 2018 02:23 pm
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