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आज भी सुरक्षित है  13 वीं शताब्दी के हस्तलिखित ताड़पत्र ग्रंथ

194 ताड़पत्रों पर लिखा हुआ है जैन आगम ग्रंथ रायपसेजी सूत्र  

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आज भी सुरक्षित है  13 वीं शताब्दी के हस्तलिखित ताड़पत्र ग्रंथ

आज भी सुरक्षित है  13 वीं शताब्दी के हस्तलिखित ताड़पत्र ग्रंथ

बीकानेर. प्राचीन काल से मानव के सामाजिक विकास की सशक्त थाती के रूप में हस्तलिखित गं्रथों, पाण्डुलिपियों का महत्व सर्वविदित है। सदियों पहले ताड़पत्र पर रचे-बसे हस्तलिखित गं्रथ देश के प्राच्य विद्या संस्थानों में संरक्षित एवं शोाधार्थियों के उपयोग के लिए सुरक्षित है। एेसा ही ताड़पत्र पर विरचित १३ वीं शताब्दी का जैन आगम ग्रंथ 'रायपसेजी सूत्रÓ बीकानेर स्थित राजस्थान प्राच्य विद्या प्रतिष्ठान में उपलब्ध है। यह जैन ग्रंथ अपने मूल एवं टीका दोनों रूप में न केवल सुरक्षित है, बल्कि जैन धर्मावलम्बियों के बीच आकर्षण का केन्द्र है। जंैन धर्म के महात्मा एवं साहित्य पर शोाध करने वाले शोधार्थी इस जैन ग्रंथ का अवलोकन करते है।

15 इंच लम्बे, 6 इंच चौड़े

सात सौ साल पुराने ताड़पत्र पर हस्तलिखित ग्रंथ 15 इंच लम्बे व 6 इंच चौडे 194 ताड़पत्रों पर प्राकृत भाषा में रचे गए है। राजस्थान प्राच्य विद्या प्रतिष्ठान बीकानेर के वरिष्ठ अनुसंधान अधिकारी डॉ. नितिन गोयल के अनुसार उपाध्याय जयचन्द्र यति संग्रह में सम्मिलित इस जैन ग्रंथ में देव व देवलोक का वर्णन है। लगभग सात सौ वर्षो के बाद भी इन ताड़पत्रों की लिखावट स्पष्टत: पठनीय है।

ग्रंथ डिजिटाईज्ड रूप में उपलब्ध

राजस्थान प्राच्य विद्या शोध संस्थान में संरक्षित सभी ग्रंथों की वर्णनात्मक सूचियां बनी हुई है एवं सभी ग्रंथ हाई रिजुलेशन पर डिजिटाईज्ड रूप में उपलब्ध है। डॉ. गोयल के अनुसार इन ग्रंथों को नियमानुसार शोधार्थियों को राजकीय दरों पर उपलब्ध करवाया जाता है।