
राजनीतिक वर्चस्व की लड़ाई, चर्चा का बाजार गर्म
संजय पारीक
श्रीडूंगरगढ़. श्रीडूंगरगढ में दो राजनेताओं के बीच राजनीतिक वर्चस्व की लड़ाई देखने को मिल रही है। नगरपालिका के बाद अब पंचायत समिति में भी इस वर्चस्व की लड़ाई का असर दिखने लगा है। दरअसल यहां वर्तमान विधायक और पूर्व विधायक के मध्य सरकारी कार्यालयों में अपने पक्ष के अधिकारी पदस्थापित करने को लेकर अदावत जगजाहिर है। पूर्व विधायक की पुत्रवधू वर्तमान में पंचायत समिति की प्रधान है।
ऐसे में पूर्व विधायक अपने पक्ष का विकास अधिकारी रखना चाहते हैं। तत्कालीन विकास अधिकारी रामचन्द्र जाट पूर्व विधायक के नजदीकी माने जाते थे, लेकिन हाल ही में उन्हें मूल विभाग में भेजकर भोमसिंह इंदा को विकास अधिकारी पद पर पदस्थापित किया गया था। इंदा ने 23 सितम्बर को पदभार ग्रहण भी कर लिया। चुनावी वर्ष में विकास अधिकारी जाट का तबादला और इंदा को पदस्थापित करवाने में वर्तमान विधायक गुट की अहम भूमिका होने की चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया।
इसी बीच शनिवार को भोमसिंह इंदा का तबादला पंचायत समिति बीकानेर विकास अधिकारी के पद पर हो गया। पंचायती राज विभाग ने सिंगल नाम से 6 अक्टूबर की तारीख में इंदा के तबादले के आदेश जारी किए। गौरतलब है कि इससे पूर्व भी एक बार यहांं पर इंदा को पदस्थापित किया गया था, लेकिन तब तत्कालीन विकास अधिकारी रामचंद्र जाट ने न्यायालय से स्थगन आदेश प्राप्त कर लिया था।
सरपंच परेशान
राजनीतिक वर्चस्व की इस लड़ाई का खामियाजासरपंचों को भुगतना पड़ सकता है। विकास अधिकारी के अभाव में मनरेगा का भुगतान अटकने की संभावना से सरपंच चिंतित नजर आ रहे हैं। जानकारी के अनुसार करीब दो वर्ष के बाद 9 अक्टूबर को ग्राम पंचायतों को मनरेगा कार्यों के भुगतान के लिए स्लॉट खुलेगा। इसमें विकास अधिकारी के हस्ताक्षर की आवश्यकता होती है, लेकिन वर्तमान में पंचायत समिति विकास अधिकारी का पद रिक्त हो गया है। ऐसे में एकबारगी भुगतान अटकने की संभावना से इनकार नही किया जा सकता।
Published on:
08 Oct 2023 01:44 am
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