
पीबीएम अस्पताल
बीकानेर . मुख्यमंत्री नि:शुल्क जांच योजना में शामिल कई जांचें पिछले 15 दिन से पीबीएम अस्पताल में नहीं हो रही है। इस वजह से मरीजों को ज्यादा पैसे देकर निजी लैब में जांच करानी पड़ रही हैं। ऐसे में सरकारी अस्पतालों में पहुंचने वाले हर आमजन को सस्ता और सहज इलाज मुहैया कराने के सरकार के दावे खोखले साबित हो रहे हैं। जांचें बंद होने की वजह किट खत्म होना बताया जा रहा है।
पीबीएम अस्पताल में मरीजों की भीड़ रहती है। यहां ओपीडी में रोजाना करीब छह हजार मरीज आते हैं। मरीज पर्ची बनाने से लेकर दिखाने तक घंटों कतार में खड़े रहते हैं। इसके बाद चिकित्सक जांचें लिखते हैं तो वे भी पूरी नहीं हो पाती। जांच के लिए भी लाइन में लगना पड़ता है और जब नंबर आता है तो टेक्निशयन जांचें बंद होने की मजबूरी बताकर लौटा देते हैं। ऐसे में मरीजों को मजबूरन बाजार से जांच करानी पड़ती है।
पीबीएम में व्याप्त इस अव्यवस्था से परिजनों में भारी आक्रोश है। जन संगठनों ने भी प्रशासन से व्यवस्था में सुधार की मांग की है। जनसंगठनों ने पीबीएम में कई अन्य अव्यवस्थाओं पर भी रोष जाहिर किया है।
बाजार में एक हजार रुपए तक
पीबीएम अस्पताल में मुख्यमंत्री नि:शुल्क जांच योजना के तहत जांचें नि:शुल्क होते हैं। वर्तमान में पीबीएम अस्पताल में जो जांच 15 दिन से नहीं हो रही हैं, वे एमएनसीवाई में शामिल हैं। इन जांचों को बाजार में कराने पर ३०० से एक हजार रुपए तक लगते हैं।
ये जांचें हैं बंद
रूमेटाइड फैक्टर टेस्ट (आरएफ)
एएसएलओ
सीरम सीआरपी
एचबीएसएजी टेस्ट (रेपीड) हैपेटाइटिस-बी की जांच
एचसीवी (हैपेटाइटिस-सी की जांच)
परेशान हैं परिजन और मरीज
सुविधा के नाम पर मरीजों को परेशान किया जा रहा है। १० दिन पहले पथरी के ऑपरेशन के लिए पुत्रवधु को दिखाया था। चिकित्सकों ने कुछ जांचें लिखी, लेकिन कई जांचें हुई नहीं। ऐसे में परेशान होकर निजी लैब से जांच करानी पड़ी। इससे आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।
- सुशीला देवी, मरीज की परिजन, बीकानेर।
जानकारी नहीं
जांचें बंद होने के संबंध में मुझे कोई जानकारी नहीं है। किट खत्म हो गई है तो शीघ्र मंगवा ली जाएगी।
- डॉ. पीके बैरवाल, अधीक्षक, पीबीएम अस्पताल
Published on:
19 Oct 2017 10:18 am
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