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चकरी नृत्य का प्रदर्शन, लोकगीतों की प्रस्तुति

बीकानेर कला, थिएटर एवं कल्चर फेस्टिवल

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चकरी नृत्य का प्रदर्शन, लोकगीतों की प्रस्तुति

चकरी नृत्य का प्रदर्शन, लोकगीतों की प्रस्तुति

बीकानेर. लोकायन संस्थान की ओर से आयोजित बीकानेर, कला, थिएटर एवं कल्चर फेस्टिवल में रविवार को पारम्परिक चकरी नृत्य, लोकगीत और भजनों की प्रस्तुति हुई। वहीं पर्यटन की संभावनाओं पर विचार विमर्श हुआ। सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला में राजस्थान के पारम्परिक चकरी नृत्य का प्रदर्शन कलाकार आशीष कल्ला ने किया। गायक कलाकार सांवर लाल रंगा ने लोक गीतों और भजनों की प्रस्तुति दी। दयानन्द शर्मा की ओर से लिखित एवं निर्देशित नाटक लेखक का कुत्ता का मंचन हुआ। लोकायन सचिव गोपाल सिंह चौहान के अनुसार फेस्टिवल में राजस्थान में कोरोना के पश्चात पर्यटन की संभावनाओं पर विचार विमर्श हुआ। इसमें निशांत जैन, संजीव नैयर, अशरफ अली ने विचार प्रस्तुत किए। शिखर संवाद में ध्रुपद गायक पद्मश्री उमाकांत गुंदेचा के साथ अनिरूद्ध उमट ने उनकी संगीत यात्रा पर संवाद किया। वहीं महोत्सवों में समृद्ध होता राजस्थान का कला संसार विषय पर भी संवाद हुआ।

फेस्टिवल में सोमवार को शिखर संवाद कार्यक्रम के तहत कोमल कोठारी के लोक संगीत में उनके योगदान को लेकर पद्मश्री अनवर खान एवं रूपायन के कुलदीप कोठारी के बीच संवाद होगा। नाट्य संवाद के अंतर्गत संवाद आयोजित होगा। कृति चर्चा, कबीर भजन, पगड़ी प्रदर्शन तथा भूले बिसरे स्वाद के अंतर्गत पारम्परिक व्यजनों को बताया जायेगा।