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PM Modi Bikaner Visit: केन्द्र के हाथ में राजस्थान की नहरों के पानी की चाबी

पंजाब में इंदिरा गांधी नहर के साठ किलोमीटर हिस्से के पुनर्निर्माण की दरकार  

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PM Modi Bikaner Visit: केन्द्र के हाथ में राजस्थान की नहरों के पानी की चाबी

PM Modi Bikaner Visit: केन्द्र के हाथ में राजस्थान की नहरों के पानी की चाबी

आजादी से पहले 1927 में निर्मित गंगनहर ( पुरानी बीकानेर कैनाल) और बाद में 1958 में निर्मित इंदिरा गांधी नहर परियोजना (आईजीएनपी) सरकारी अनदेखी का शिकार है। दोनों नहरों को दूरगामी सोच से बनाया गया। अब दूरगामी तो दूर वर्तमान जरूरत को भी सरकारें अनदेखा कर रही हैं। आईजीएनपी का पंजाब क्षेत्र में आने वाला 60 किलोमीटर फीडर को पुनर्निर्माण की दरकार है। गंगनहर को पानी देने वाला पंजाब क्षेत्र का फिरोजपुर फीडर भी जगह-जगह से क्षतिग्रस्त है। निर्माण के समय 18 हजार क्यूसेक पानी लेने की क्षमता वाली आईजीएनपी आज 12 हजार क्यूसेक पानी भी लेने पर बिखरने की कगार पर पहुंच जाती है। केन्द्र सरकार ही राजस्थान की दोनों नहरों को पूरा पानी दिलाने के लिए कोई कदम उठा सकती है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 8 जुलाई को बीकानेर आ रहे हैं। ऐसे में क्षेत्र के किसानों को पीएम से इस मुद्दे पर कुछ ठोस घोषणा की उम्मीद है। राजस्थान के दस जिलों को पेयजल उपलब्ध करवा रही आईजीएनपी का राजस्थान जल क्षेत्र पुनर्गठन परियोजना के तहत राजस्थान में 3300 करोड़ से पुनर्निर्माण किया जा रहा है। जो 2025 में पूरा होगा। इसके बाद प्रधानमंत्री जल जीवन मिशन के तहत दस जिलों के ग्रामीण परिवारों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध करवाने के लिए नहर का 1200 क्यूसेक से बढ़कर 2400 क्यूसेक पानी पेयजल के लिए आरक्षित हो जाएगा। इसका सीधा असर इस नहर के वर्तमान सिंचित चार जिलों हनुमानगढ़, श्रीगंगानगर, बीकानेर और जैसलमेर के कृषि उत्पादन पर पड़ेगा।

मरम्मत-पुनर्निर्माण के बाद मिल सकेगा पानी

अंतरराज्यीय समझौते के तहत इंदिरा गांधी नहर में राजस्थान का हिस्सा 8.6 एमएएफ है। लेकिन नहर के क्षतिग्रस्त होने के कारण वर्तमान में राजस्थान को 5.4 एमएएफ पानी मिल रहा है। नहर का पानी पहले हनुमानगढ़, श्रीगंगानगर, बीकानेर और जैसलमेर जिलों की सिंचाई एवं पेयजल की जरूरत को पूरा कर रहा था। अब इसके पानी से बाड़मेर, जोधपुर, नागौर, चूरू, सीकर और झुंझुनूं जिलों की आबादी की भी प्यास बुझ रही है। नहर की मरम्मत और पुनर्निर्माण कार्य होने पर ज्यादा पानी लिया जा सकेगा।

रिपोर्ट केन्द्रीय जल आयोग के पास

इंदिरा गांधी नहर फीडर के पंजाब वाले हिस्से के पुनर्निर्माण की तरफ ध्यान ही नहीं दिया गया। अब 1200 क्यूसेक और पानी की जरूरत प्रधानमंत्री जल जीवन मिशन के लिए महसूस हुई तो राजस्थान सरकार ने इसके लिए पंजाब सरकार को लिखा। मुख्य अभियंता जल संसाधन उत्तर क्षेत्र अमरजीत मेहरड़ा ने बताया कि पंजाब सरकार ने 60 किलोमीटर हिस्से के पुनर्निर्माण के लिए प्री फिजिबिलिटी रिपोर्ट केन्द्रीय जल आयोग को भेज दी है। राज्य सरकार ने इस पर अपनी सहमति दे दी है। अब केन्द्रीय जल आयोग से मंजूरी जारी हो तो पंजाब में नहर के पुनर्निर्माण का कार्य सिरे चढ़ सके। इंदिरा गांधी नहर परियोजना का आरडी 961 से लिया गया विहंगम दृश्य। इसमें मुख्य नहर से दो नहरें निकलती दिख रही है। एक जोधपुर व जैसलमेर जा रही है। जबकि दूसरी बीकानेर जिले के सीमावर्ती क्षेत्र को सिंचित करती है।

गंगनहर में भी समस्या
श्रीगंगानगर जिले को सिंचित करने वाली गंगनहर को पानी की आपूर्ति पंजाब की फिरोजपुर फीडर से होती है। यह नहर अपनी आयु पूर्ण कर चुकी है। नहर की लाइनिंग जगह-जगह से क्षतिग्रस्त हो चुकी है। इसका खमियाजा गंगनहर के किसानों को भुगतना पड़ रहा है। राजस्थान की ओर से बार-बार कहने पर पंजाब ने इसी साल 18 मई को पुनर्निर्माण की प्रोजेक्ट रिपोर्ट केन्द्रीय जल आयोग को भिजवाई है। पुनर्निर्माण पर 530 करोड़ रुपए लागत आएगी। इसमें से 200 करोड़ रुपए राजस्थान के हिस्से के है। जो सरकार देगी तब पंजाब काम कराएगा।

पंजाब नहर टूटने के डर से नहीं देता पानी
पंजाब-हरियाणा में इंदिरा गांधी नहर फीडर की लंबाई 170 किलोमीटर हैं। इसमें नहर के उद्गम हरिके बैराज से आरडी 179 तक 60 किलोमीटर हिस्से में अभी तक पुनर्निर्माण का कोई काम नहीं हुआ है। जबकि नहर का यही हिस्सा सबसे ज्यादा क्षतिग्रस्त है। इसी कारण पंजाब 18000 क्यूसेक क्षमता वाली इस नहर में 11000 क्यूसेक से अधिक पानी इस डर से नहीं छोड़ता कि नहर टूटी तो पंजाब के कई इलाके डूब जाएंगे। नहर के क्षतिग्रस्त होने का खमियाजा राजस्थान के किसान डेढ़ दशक से भुगत रहे हैं।