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बीकानेर में बनने वाली काठ की गणगौर के सौन्दर्य की दुनिया कायल, कीमत जानकर हो जायेंगे हैरान

बीकानेर में काठ यानि लकड़ी से तैयार की जाने वाली ईसर-गणगौर की दुनिया कायल है।

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Gangaur

गणगौर

बीकानेर . बीकानेर में काठ यानि लकड़ी से तैयार की जाने वाली ईसर-गणगौर की दुनिया कायल है। यहां बनाई जाने वाली ईसर और गणगौर ? के चेहरे पर इतनी बारीकी से कारीगरी होती है कि देखने वाले को एेसा लगता है कि वह उससे बातें कर रही है।

यही नहीं जिस भी परिवार में गणगौर जाती है उसके पूजन के दौरान ही एेसा लगने लग जाता है कि गणगौर का नाक-नक्श पूजन करने वाली परिवार की महिलाओं के जैसा ही है। इन खासियत के बलबूते देशभर में बसे राजस्थानियों की पहली पसंद बीकानेर में बनने वाली गणगौर है।

भारी मांग के चलते करीब तीन महीने से यहां के कारीगर ईसर-गणगौर और भाइया की काठ की प्रतिमा बनाने में जुटे हुए हैं। कारीगर बताते हैं कि प्रवासी राजस्थानी दो महीने पहले से ऑर्डर दे रहे है। दिल्ली, कोलकात्ता, मुम्बई, मद्रास, अहमदाबाद, सूरत जैसे महानगरोंं में बीकानेर के बड़ी संख्या में परिवार बसे हुए है।

वे बीकानेर में बनी गणगौर और ईसर की खरीद करते है। असल में यहां बनाई जाने वाली गणगौर के नाक, नक्श अन्य स्थानों पर बनाई जाने वाली गणगौर से भिन्न और सुन्दर होते हैं। यही वजह है कि बीकानेर की गणगौर को लेना पसंद करते हैं।

कई कारीगरों की मेहनत
बाजार में आदमकद की गणगौर भी बिक्री के लिए उपलब्ध होती है। लेकिन इसे ऑर्डर पर ही बनाया जाता है। कारीगरों ने बताया कि एक छोटी गणगौर और ईसर को बनाने में करीब दस से पन्द्रह दिन का समय लगता है।

वहीं बड़ी गणगौर को बनाने में करीब तीन से चार माह का समय लग जाता है। इतना ही नहीं इसे बनाने में अलग-अलग कारीगरों की जरूरत भी पड़ती है। कुछ कारीगर हाथ और नाक नक्शे बनाने के माहिर होते हैं। वहीं कुछ कारीगर इसके रंग-रोगन में।

सौ साल पुरानी गणगौर भी
गणगौर बनाने में माहिर शिव सुथार ने बताया कि शहर में कुछ एेसी भी गणगौर प्रतिमाएं हैं, जो करीब सौ साल तक पुरानी है। गणगौर त्योहार को बीकानेर में खासे उत्साह से मनाया जाता है। यहां की परम्पराओं के चलते गणगौर को देवी का रूप माना जाता है।

यही कारण है कि इसकी सार-संभाल घर की छोटी से बड़ी महिलाओं और बच्चियों के जिम्मे होता है। करीब बीस दिन गणगौर उत्सव को मनाने के बाद इसे संभाल कर वापिस रख दिया जाता है।

एक लाख रुपए तक कीमत
गणगौर की कीमत उसकी सुन्दरता और उसे बनाने में उपयोग ली गई लकड़ी पर निर्भर करती है। कारीगर शिव सुथार और गिरधर सुथार ने बताया कि बाजार में एक हजार से एक लाख तक की कीमत में गणगौर उपलब्ध है।

एक हजार रुपए वाली गणगौर में जहां फोग-रोहिड़ा और पाइन की लकड़ी काम में ली जाती है। वहीं महंगी गणगौर में सागवान की लकड़ी काम ली जाती है। कारीगरों की मानें तो महंगी कीमत वाली गणगौर के रंग दस-पन्द्रह सालों तक खराब नहीं होते। वहीं मजबूत लकड़ी के चलते खंडित होने का डर भी नहीं रहता।