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‘समानता और समरसता संघ का चरित्र’: प्रो. राकेश सिन्हा, देखिये वीडियो

सामाजिक परिवर्तन में समानता का भाव जरूरी है। जाति संघर्ष देशहित में उचित नहीं है।

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Prof. Rakesh Sinha news

बीकानेर. सामाजिक परिवर्तन में समानता का भाव जरूरी है। जाति संघर्ष देशहित में उचित नहीं है। शनिवार को शकुन्तला भवन में पत्रकारों से बातचीत करते हुए संघ विचारक और भारत नीति प्रतिष्ठान के निदेशक प्रो. राकेश सिन्हा ने यह बात कही। उन्हांेने कहा कि समानता और समरसता संघ का चरित्र है। देश में समाज को एक रखने के लिए संघ कार्य कर रहा है। आरएसएस डॉ. भीमराव अम्बेडकर को किसी विशेष अवसर पर नहीं बल्कि साल के 365 दिन याद करता है।

बाबा साहेब ने अपने जीवन में कभी भी न तो आरएसएस के लिए कुछ कहा और ना ही कुछ लिखा। एक सवाल के जवाब में सिन्हा ने कहा कि संघ देश में गैर बराबरी को खत्म करने की बात करता है। एक मंदिर , एक कुआ और एक श्मशान की व्यवस्था की बात करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने अपने राजनीतिक फायदे के लिए बाबा साहेब के नाम का उपयोग किया। दो अप्रेल को भारत बंद के दौरान हुई घटनाओं पर उन्होंने कहा कि हिंसा को किसी भी स्थिति में उचित नहीं माना जा सकता है।

एससी एसटी एक्ट में संशोधन के सवाल पर उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला अनुचित है। अगर कोई व्यक्ति इस एक्ट का दुरूपयोग करता है तो उसे सजा मिले। आरक्षण को सही बताते हुए सिन्हा ने कहा कि दलितों, पिछड़ों के सर्वांगीण उत्थान के लिए आरक्षण जरुरी है।

कश्मीरी पंडितों की समस्या पर उन्होंने बताया कि कश्मीर घाटी परिस्थितियां बदले, संघ अपने स्तर पर यहां काम कर रहा है। घाटी में संघ की शाखा पहुंची है। इस अवसर पर जोधपुर प्रांत संघ चालक ललित शर्मा, विभाग संघ चालक टेकचंद बरडिय़ा आदि उपस्थित थे।

'बलात्कारी को मिले सख्त सजा'
संघ विचारक सिन्हा ने कहा कि विश्व में किसी भी स्थान पर अगर बलात्कार जैसी घटना होती है तो यह मानवता को शर्मसार करने वाली है। बलात्कार अमानवीय, कुकृत्य और मानवता पर कलंक है। इस पर कोई राजनीति नहीं होनी चाहिए। बलात्कारी को सख्त से सख्त सजा मिलनी चाहिए।

'समाज को विघटित करने वाली शक्तियों से रहें सावधान'
बीकानेर. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ बीकानेर महानगर की ओर से शनिवार को डॉ. बी आर अम्बेडकर जयंती कार्यक्रम का आयोजन राजमंदिर मैरिज पैलेस रानी बाज़ार में हुआ। मुख्य वक्ता दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर, भारत नीति प्रतिष्ठान के निदेशक और आरएसएस विचारक राकेश सिन्हा ने भारतीय संस्कृति के रक्षक बाबा साहेब आंबेडकर के विचारों की व्याख्या की।

उन्होंने अश्पृश्यता को हिन्दू समाज से समूल नष्ट करने का आह्वान करते हुए भारतीय धर्म और चिंतन में वंचित समाज के योगदान का उल्लेख किया। प्रो. सिन्हा ने वाल्मीकि, वेदव्यास को मूल भारतीय दृष्टि का सृष्टा मानते हुए अनुसूचित समाज के हिन्दू धर्म में योगदान को अमूल्य बताया। बाबा साहेब अंाबेडकर को भारत का राष्ट्र निर्माता ही नहीं भारतीय धर्म और बुद्धि को गहरे तक प्रभावित करने वाला महान नेतृत्व कर्ता कहा।

उन्होंने भारतीय समाज को विघटित करने वाली शक्तियों से सावधान रहकर डॉ आंबेड़कर के पदचिन्हों पर चलने का आग्रह किया। कार्यक्रम में महापौर नारायण चौपड़ा, डॉ पी.के बेरवाल प्रो.एच डी चारण, मोहनलाल सिंगारिया, सुबोध गिरी महाराज, बिंदु खत्री, जवानाराम नायक, डॉॅ. बी के बिनावरा, मेघा रतन, नरोत्तम व्यास, महानगर संघ चालक बाल किशन मंचस्थ थे। इस दौरान सर्व समाज बंधुओं का सहभोज का भी आयोजन हुआ।