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देशभर से दूल्हे-दुल्हन शादी करने आएंगे बीकानेर, 400 साल पुरानी परम्परा से होगी 300 शादी

Rajasthan News: देशभर से दूल्हे-दुल्हन शादी करने आएंगे राजस्थान के जिले बीकानेर में आएंगे। यहां प्रत्येक 2 साल में पुष्करणा ब्राह्मण समाज का सामूहिक विवाह होता है। जिसमें इस साल करीब 300 शादी होगी।

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Rajasthan Big Wedding: एक दिन, एक मुहूर्त और सैकड़ों शादियां। शहर का परकोटा बनेगा छत और शहरवासी बाराती। हर गली-मोहल्ले से निकलेगी बारातें। इतनी बड़ी संख्या में शादियां कि पूरे शहर के भवन भी कम पड़ेंगे। प्रत्येक दो साल बाद बीकानेर में होने वाले पुष्करणा ब्राह्मण समाज का सामूहिक विवाह (सावा) इस बार 18 फरवरी को होगा। इसमें देशभर के विभिन्न शहरों में रह रहे समाज के परिवार अपने लड़के-लडकियों की शादी करने अपनी मातृभूमि बीकानेर पहुंचने शुरू हो गए हैं। कम खर्च में अधिक शादियों के लिए प्रसिद्ध इस विवाह परम्परा की जड़ें इतनी गहरी हैं कि बीकानेर के जाये-जन्मे चाहे देश के किसी भी स्थान पर रहे, लेकिन विवाह के लिए उनकी जन्मभूमि ही वेडिंग डेस्टिनेशन है। समाज के परिवारों को इस सावे का इंतजार रहता है। जानकारों के अनुसार यह परम्परा चार सौ साल से भी ज्यादा पुरानी है। 18 फरवरी को एक दिन में बीकानेर में 300 से ज्यादा शादियां होंगी।

इस दिन बड़ी संख्या में होने वाली शादियों का अनुमान इसी बात से लगाया जा सकता है कि राज्य सरकार ने भी पुष्करणा सावे के दिन पूरे शहर के परकोटे को एक छत माना है। सामूहिक विवाह एक भवन या एक स्थान पर होते हैं, लेकिन इस दिन इतनी शादियां होती हैं कि उनको एक भवन या एक स्थान पर संपन्न नहीं करवा सकते। इसलिए सरकार की ओर से परकोटा क्षेत्र को ही एक छत घोषित कर दिया गया है। घर-घर और भवनों में शादियां होंगी। गली-मोहल्लों में टैंट लगेंगे।
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कम खर्च, अधिक शादियां
मितव्ययिता और सामूहिकता के लिए पुष्करणा सावा प्रसिद्ध है। कम खर्च में अधिक शादियां इस सामूहिक विवाह का उद्देश्य है। शताब्दियों से यह सामूहिक विवाह अपने इन उद्देश्यों की पूर्ति कर रहा है।


सावा हमारी परम्परा-धरोहर
पुष्करणा सावा हमारी प्राचीन परम्परा और समाज की धरोहर है। कम खर्च में अधिक शादियां और सामूहिकता, इसका उद्देश्य है। मैं अपनी जन्मभूमि पर अपनी पुत्री का विवाह संपन्न करवाने के लिए परिवार के साथ बीकानेर पहुंच रही हूं।
- सुनीता देरासरी, कोलकाता निवासी

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मॉडल के रूप में देशभर में हो लागू
पुष्करणा सावा ऐतिहासिक और प्राचीन है। सावे के अपने रीति-रिवाज है। इस दिन अन्य समाज के लोग भी विवाह संपन्न करते हैं। यह सावा मॉडल के रूप में अन्य शहरों में भी लागू होना चाहिए। मेरे पुत्र का विवाह 18 फरवरी को बीकानेर में होगा।
लक्ष्मण व्यास, पूर्व अध्यक्ष, राजस्थान ललित कला अकादमी