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कुत्ता काटे, तो जख्म को 15 मिनट तक साबुन-पानी से धोएं, रेबीज पर जरूरी जानकारी

रेबीज एक शत-प्रतिशत जानलेवा बीमारी है, जिसे रेबीज हो गया उसके लिए कोई ईलाज नहीं है। संक्रमित व्यक्ति विभिन्न लक्षणों के साथ हाइड्रोफोबिया का शिकार हो जाता है। उसे पानी देखकर ही डर लगने लगता है। दिमाग में संक्रमण बढ़ने के साथ ही मरीज की मृत्यु हो जाती है।

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कुत्ता काटे, तो जख्म को 15 मिनट तक साबुन-पानी से धोएं, रेबीज पर जरूरी जानकारी

कुत्ता काटे, तो जख्म को 15 मिनट तक साबुन-पानी से धोएं, रेबीज पर जरूरी जानकारी

बीकानेर. कुत्ते-बिल्ली-बंदर आदि जानवरों के काटने या खरोचने पर हुए घाव को तुरंत साफ पानी व साबुन के साथ 15 मिनट तक धोना चाहिए। फिर एंटीसेप्टिक लगाकर एंटी रेबीज वैक्सीन के लिए अस्पताल ले जाना चाहिए। यह सलाह विश्व रेबीज दिवस के अवसर पर आयोजित ऑनलाइन वेबीनार में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मोहम्मद अबरार पंवार ने दी। उन्होंने बताया कि रेबीज एक शत-प्रतिशत जानलेवा बीमारी है, जिसे रेबीज हो गया उसके लिए कोई ईलाज नहीं है। संक्रमित व्यक्ति विभिन्न लक्षणों के साथ हाइड्रोफोबिया का शिकार हो जाता है। उसे पानी देखकर ही डर लगने लगता है। दिमाग में संक्रमण बढ़ने के साथ ही मरीज की मृत्यु हो जाती है। लेकिन पशु के काटने पर यदि एंटी रेबीज वैक्सीन की समस्त डोज तय समय अनुसार लगवा ली जाए, तो उसका बचना भी सुनिश्चित है।

रेबीज को लेकर और जानकारी दी

पशु पालन विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ शिव प्रसाद जोशी ने वेबीनार में बताया कि पशु पालन विभाग की ओर से पालतू जानवरों को एंटी रेबीज वैक्सीन निःशुल्क लगाई जा रही है। पशुपालकों व पशु प्रेमियों को जूनेटिक डिजीज के बारे में लगातार जागरूक भी किया जा रहा है। डिप्टी सीएमएचओ डॉ लोकेश गुप्ता ने रेबीज दिवस के साथ ही शुरू हुए एंटी रेबीज सप्ताह के दौरान आयोजित होने वाली गतिविधियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि रेबीज एक वायरस जनित रोग है। यह वायरस कुत्ते, बिल्ली, बंदर, भेड़िया आदि की लार में मौजूद होता है। संक्रमित जानवर के काटने से मनुष्य में बीमारी का फैलाव होता है। इन जानवरों के काटने के 2-3 दिन से लेकर दो-तीन वर्ष बाद तक रेबीज के लक्षण उभर सकते हैं। ब्लॉक सीएमओ डॉ. सुनील हर्ष ने बचाव के तरीकों के प्रचार प्रसार की आवश्यकता पर जोर दिया।

बच्चों में यह ध्यान जरूर दें

नोखा के ब्लॉक सीएमओ डॉ. कैलाश गहलोत ने कहा कि यदि किसी बच्चे को चोट लगी हो, तो माता-पिता को यह जानने का प्रयास करना चाहिए कि कहीं किसी जानवर ने तो नहीं काटा है ? क्योंकि प्राय: बच्चे ऐसी बात छुपा जाते हैं और इसके गंभीर परिणाम भुगतने पड़ते हैं। वेबीनार का संचालन जिला आईईसी समन्वयक मालकोश आचार्य ने किया।

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