
विधायक बिश्नोई ने दलित परिवारों के पुनर्वास का उठाया मुद्दा
नोखा. नोखा विधायक बिहारीलाल बिश्नोई ने बुधवार को विधानसभा में साठिका गांव में दलित परिवारों के पुनर्वास का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि गोचर भूमि में करीब ७५ वर्ष से बैठे दर्जनों परिवारों के मकान तोड़ लोगों को बेघर कर दिया। उनमें 42 घर दलित परिवारों के थे। उन्होंने लंबित भू-आवंटन की कार्रवाई को जल्द पूर्ण करने की बात भी कही। बिश्नोई ने नोखा विधानसभा क्षेत्र में प्रत्येक ग्राम पंचायत मुख्यालय को गिरदावर सर्किल बनाने व प्रत्येक गांव को पटवार सर्किल बनाने की मांग रखी।
बिश्नोई ने क्षेत्र में नए राजस्व गांव बनाने की मांग रखी। इनमें केशुपुरा रोड़ा, भोम ढाणी जांगलू, खीचड़ो की ढाणी बंधाला, नाइयों की ढाणी, ढिंगसरी, हनुमान नगर, सारूण्डा, लोहियो की ढाणी कक्कू, खेतारों की ढाणी रोड़ा, सियागो की ढाणी जांगलू, गोदारों की ढाणी देसलसर, मेघवालों की ढाणी, अमलाव तालाब, पिथरासर, भाटिया मेघवालों की ढाणी मैनसर शामिल है।
बिश्नोई ने पांचू पंचायत समिति पर उप तहसील, तहसील कार्यालय खोलने की मांग की। वहीं राजस्व गांवों में आबादी भूमि विस्तार के लिए अन्यत्र उपलब्ध अराजीराज व सिवायचक भूमि को गोचर, ओरण की क्षतिपूर्ति के रूप में सेटअप पार्ट के माध्यम से भूरूपांतरण करने तथा वर्तमान में अराजीराज व सिवायचक भूमि पर बसे परिवारों को पट्टे जारी करने की बात रखी। उन्होंने इस कार्य के लिए जिला कलक्टर को अधिकृत करने की मांग की।
21 जून को हो पर्यावरण दिवस
विधायक बिश्नोई ने कहा कि पर्यावरण दिवस ५ जून के स्थान पर २१ जून को मनाया जाना चाहिए। उन्होंने तर्क देते हुए कहा कि 21 सितम्बर, 1730 को अमृतादेवी बिश्नोई के नेतृत्व में 363 लोगों ने बलिदान दिया था। पेड़ों के बदले इंसानों के प्राण आहूत करने की यह घटना पूरे विश्व मे दुर्लभतम है। अत: विश्व पर्यावरण दिवस 21 सितम्बर को मनाए जाने का प्रस्ताव सदन के माध्यम से केंद्र सरकार को भिजवाया जाए। साथ ही खेजड़ली को वैश्विक धरोहर में अधिसूचित करने की मांग की। बिश्नोई ने पांचू में रेस्क्यू सेंटर खोलने व नोखा तहसील मुख्यालय पर स्टाफ के साथ एम्बुलेंस की व्यवस्था की मांग रखी।
मुकाम राष्ट्रीय पर्यटन स्थल अधिसूचित हो
उन्होंने पर्यावरण के प्रणेता गुरु जम्भेश्वर भगवान के मुख्य धाम मुकाम को राष्ट्रीय पर्यटन स्थल में अधिसूचित करवाने, नोखा तहसील के सैगाल धोरा, साठिका, सुसवाणी माता मंदिर, मोरखाना को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने, ऐतिहासिक बरिंगर नाड़ी, जांगलू को जल संरक्षण के बड़े स्रोत के तौर पर विकसित करने की मांग रखी। उन्होंने नोखा तहसील के गांव उदासर, पांचू, नाथूसर, भादला, साइंसर, साठिका, बंधाला, जांगलू, छींपा नाड़ा, जेगला से होते हुए देशनोक तक रेतीले धोरों को कैमल सफारी के लिए चिह्नित करने की मांग की।
Published on:
18 Jul 2019 12:30 pm
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